राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव में देश भर की लोक संस्कृतियों के बीच बनारस घराने की गायकी ने भी अपनी छाप छोड़ी। महोत्सव में विश्वविख्यात कलाकारों के बीच पद्मविभूषण गिरिजा देवी ने पहली प्रस्तुति दी।
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संस्कृति महोत्सव में बिखरी बनारस की गायकी की खुशबू
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Rashtriy Sanskriti Mahotsav
- फोटो : अमर उजाला
दादरा और ठुमरी की रानी विदुषी गिरिजा देवी ने ख्याल, चैती, दादरा अंग की गायकी से आयोजन को ऊंचाई दी। शिव की नगरी में हो रहे राष्ट्रीय महोत्सव की शुरुआत उन्होंने भगवान शंकर के नाम से ही की।
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उन्होंने भगवान शिव पर ख्याल प्रस्तुत किया जिसके बोल थे- हे महादेव माहेश्वर...। इसके बाद उन्होेंने भगवान कृष्ण की स्तुति की। अंतिम प्रस्तुति उन्होंने मीराबाई पर दी जिसके बोल थे- ‘हरि तुम काहे प्रीत लगाई...’।
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हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र, सारंगी पर कन्हैया लाल मिश्र, तबले पर आशीष मिश्र और तानपूरे पर सह गायिका ममता शर्मा और पद्मजा ने संगत की। इससे पहले पुरुलिया छाऊ नृत्य की प्रस्तुति हुई।
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प. बंगाल की बालाओं ने अपने नृत्य से वहां की लोक संस्कृति मंच पर जीवंत की। अवध के कलाकारों ने फरुवाई नृत्य पेश किया।
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इन सभी प्रस्तुतियों में संदेश यही था- अपनी माटी, अपना देश, अपनी संस्कृति, सर्वोपरि। पंडवानी गायिका ऋतु वर्मा ने भी सुर छेड़े। पहले दिन कबीर गायन का भी गवाह बना संस्कृति महोत्सव।