आलीशान ‘राजमहल’ क्रूज से गंगा के रास्ते काशी पहुंचे विदेशी मेहमानों ने बुधवार को समृद्ध राजशाही ठाट को नजदीक से महसूस किया। उन्होंने बुधवार को रामनगर और चुनार किला की सैर करने के साथ उसके इतिहास के बारे में जानकारी हासिल की। इस दौरान उन्होंने राजाओं के इतिहास और उनके ठाट-बाट, शान-ओ-शौकत से जुड़ी वस्तुओं को देखा और उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल की। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
राजमहल के मैनेजर रौमित ने बताया कि विदेशी सैलानियों को गंगा नदी के रास्ते पहले रामनगर और फिर चुनार किला ले जाया गया। इस दौरान उनके साथ क्रूज के कर्मचारी भी मौजूद रहे और उन्हें भारतीय इतिहास में दर्ज रामनगर और चुनार किला की जानकारी दी गई। विदेशी मेहमानों ने इस दौरान अपनी यात्रा को यादगार बनाने के लिए कई जगहों पर फोटो, वीडियो भी बनाई।
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शाम के वक्त राजमहल वापस खिड़किया घाट पहुंचा और वहीं लंगर डाला। गुरुवार को सैलानियों को काशी की गलियों, घाटों पर भ्रमण के साथ ही गंगा आरती के दर्शन कराए जायेंगे। बतादें कि राजमहल क्रूज 2014 से बाढ़ के मौसम में विदेशी सैलानियों को लेकर हर साल काशी आता है।
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वाराणसी से गंगा के रास्ते विदेशी मेहमानों को लेकर बुधवार को दोपहर लगभग ढाई बजे जल मंत्रालय भारत सरकार का राजमहल क्रूज चुनार पहुंचा। क्रूज में विभिन्न देशों के कुल 23 लोग सवार थे। जिसमें से 14 सदस्य राजमहल क्रूज से उतरे, जबकि 9 सदस्य क्रूज में ही बैठे रहे और वहीं से चुनार किले को देखते रहे।
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विदेशी मेहमान गंगा के गहरे पानी में क्रूज से उतरकर मोटरबोट पर सवार होकर बालूघाट गंगा तट पर पहुंचे। वहां से वाहन से चुनार का ऐतिहासिक दुर्ग देखने पहुंचे। 23 सदस्यीय टीम में 21 ब्रिटेन, एक अमेरिका एवं एक हांगकांग के सदस्य शामिल रहे। इन सदस्यों में 11 महिला व 12 परुष मौजूद रहे। । चुनार दुर्ग से नगर के विहंगम दृश्य को देखने के बाद सभी ने कहा कि चुनार इज वेरी नाइस प्लेस। यहां का नजारा देख सभी अभिभूत रहे।
मेहमानों को इंडियन टूरिज्म के गाइड अखिलेश सिंह ने विस्तार से चुनार दुर्ग, हजरत बाबा कासिम सुलेमानी की दरगाह व अन्य स्थलों के बारे में जानकारी दी। लगभग तीन घंटे तक नगर में समय बिताने के बाद वे वाराणसी लौट गए। पर्यटकों में ब्राइन हेलेन, डेविड, वर्नड, जैकलीन, शैम, लोजा, वेनजानिम, ज्योतिराव दास आदि शामिल रहे।