वाराणसी के रविदास पार्क के सामने गंगा पार रेती पर शुक्रवार को शिल्प का संसार सजा। सैंड आर्ट की खूबसूरती को हर किसी ने अपनी आंखों में बसाया। गुरु रामछाटपार की जयंती पर सैंड आर्टिस्ट का जमावड़ा हुआ तो फिर देखते ही देखते तमाम विषयों, परिकल्पनाओं से होते हुए सैंड आर्ट की दुनिया अपना खूबसूरत आकार लेती चली गई। आगे की स्लाइड्स में देखें...
विज्ञापन
2 of 7
sand art
- फोटो : अमर उजाला
तीन तलाक, छेड़खानी, कन्या भ्रूण हत्या और चारा घोटाला आदि विषय रेत पर जीवंत हुए तो उनके जरिए समाज के लिए, युवाओं-महिलाओं के लिए संदेश भी बेहद खास थे। कलाकारों ने रेत पर बने लाल किले में तिरंगा लहराया और अजंता की खूबसूरत गुफाओं की सैर कराई।
विज्ञापन
3 of 7
sand art
- फोटो : अमर उजाला
भगवद्गीता का संदेश भी था और शिव की काशी और नंदी के अलौकिक स्वरूप भी। केंद्रीय विद्यालय और सनबीम एकेडमी के बच्चों सहित करीब चार सौ सैंड आर्टिस्ट आयोजन में शामिल हुए और अपनी कला की चमक बिखेरी।
4 of 7
sand art
- फोटो : अमर उजाला
गंगापुर कैंपस के रूपेश ने लालू का चारा घोटाला, काशी विद्यापीठ के सूरज बाली व धीरेंद्र पीजी कॉलेज की लक्ष्मी ने तीन तलाक, बीएचयू के रवि ने सेव एलीफैंट, आजमगढ़ की टीम ने गोरक्षा, एनटीपीसी की टीम ने भागवत गीता को आकार दिया।
विज्ञापन
5 of 7
sand art
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू की टीम ने शिव काशी, इलाहाबाद की टीम ने साइबर पेशेंट, गोपीगंज की टीम ने तिरंगे के साथ लाल किला, सनबीम के सुमित ने विश्वशांति, काशी विद्यापीठ के अमित ने कानपुर रेल हादसा, बीएचयू के मोनू कुमार ने चाइनीज मांझा, ईश्वर दयाल ने लोकतंत्र, जीवनदीप की टीम ने सेव गर्ल चाइल्ड की परिकल्पना को रेत पर आकार दिया।
विज्ञापन
6 of 7
sand art
- फोटो : अमर उजाला
असम में रेल दुर्घटनाओं में हाथियों की मारे जाने की घटना पर आधारित कृति का संदेश साफ था कि बेजुबानों की रक्षा करें। गोरक्षा का भी संदेश दिया।
बीएचयू में हुई छेड़खानी और फिर लाठीचार्ज की घटना का दर्द भी कलाकारों ने रेत पर उकेरा। यौन एवं बाल हिंसा, कन्या भ्रूण हत्या, गंगा प्रदूषण की पीड़ा को भी रेती पर उकेरा गया।