काशी में आज की रात फर्जी संतों की ‘नाक’ कटेगी। फर्जी संतों के अलावा आतंकवाद, चाइनीज वस्तुओं के बहिष्कार समेत कई मुद्दों पर आधारित झांकियां निकाली जाएंगी। इसमें जेल में बंद बाबा राम रहीम-हनीप्रीत की झांकी आकर्षण का केंद्र होगी। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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रविवार की रात चेतगंज की ऐतिहासिक ‘नक्कटैया’ संपन्न होगी। यह लीला केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्वप्रसिद्ध मानी जाती है। भारत के कोने-कोने से भक्तगण भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। इसमें भारत के कोने-कोने से भक्तगण भगवान के दर्शन के लिए आएंगे।
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बनारस की सर्वाधिक मशहूर नक्कटैया चेतगंज की मानी जाती है। काशी में चेतगंज की रामलीला कार्तिक में होती है। विजयादशमी के एक सप्ताह बाद कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (करवा-चौथ) की रात चेतगंज मुहल्ले में लाखों की भीड़ वाला 'लक्खी मेला' अर्थात चेतगंज की नक्कटैया सम्पन्न होती है।
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इस बार की नक्कटैया की झांकियों में राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बनी घटनाओं को तबज्जो दी जाएगी। इसमें जेल में बंद बाबा राम रहीम-हनीप्रीत की झांकी आकर्षण का केंद्र होगी। रात 12 बजे चेतगंज थाने के पास नक्कटैया का उद्घाटन जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र करेंगे।
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इलाहाबाद, जौनपुर, मिर्जापुर से चौकियां और झांकिया नक्कटैया में शामिल होंगी। छह से अधिक स्वागत द्वार बनाए गए हैं। इस लक्खा मेला के लिए एक किमी लंबे परिक्षेत्र की सड़कों को लाल, नीली झालरों से सजाया गया है।
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134 वर्ष पहले धार्मिक झांकियों और स्वांगों के जरिए अंग्रेजों का विरोध करने के लिए इस चलायमान लीला की शुरुआत बाबा फतेह राम ने की थी। चेतगंज चौराहे के पास रविवार की रात नौ बजे सूपर्णखा की नाक कटने के साथ ही इस लीला का मंचन आरंभ होगा।
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मलदहिया के पटेल चौक से रात 12 बजे नक्कटैया की झांकियां हाथी, घोड़े, ऊंटों से सुसज्जित खर-दूषन की सेना के रूप में निकाली जाएंगी। महाबली भाइयों की सेना लेकर सबसे आगे सूपर्णखा चलेगी। लाग-विमानों में दशानन भी दिखेगा।
पिशाचमोचन, चेतगंज थाने से होकर लहुराबीर चौराहा, चउरछटवा, चेतगंज चौमुहानी, बेनबाबा मंदिर से मथुरा प्रसाद रोड तक जहां से झांकियां गुजरेंगी उन रास्तों को रंग-बिरंगी झालरों, ट्यूब लाइट से सजा दिया गया है।