बीएचयू में हुए बवाल मामले को लेकर स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव गुरुवार को विश्वविद्यालय पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। इस बात को लेकर उनकी और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। उनके आगमन के मद्देनजर बीएचयू के लंका गेट पर काफी संख्या में फोर्स मौजूद थी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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yogendra yadav
- फोटो : अमर उजाला
योगेंद्र यादव बीएचयू कैंपस में छात्रा के साथ छेड़खानी, लाठीचार्ज, विद्यार्थियों पर मुकदमा दर्ज होने आदि घटनाओं के विरोध में गुरुवार को कुलसचिव से मिलने पहुंचे थे। शाम करीब तीन बजे वह जैसे ही लंका गेट पर पहुंचे पुलिस ने रोक लिया।
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लंका एसओ ने तत्काल गेट बंद करा दिया और सुरक्षा के लिहाज से वहां भारी संख्या में पुलिस, पीएसी जवानों को लगा दिया। इस पर योगेंद्र की पुलिस से नोंकझोंक भी हुई। करीब घंटे भर की जद्दोजहद के बाद योगेंद्र को बिना कुलसचिव से मिले ही वापस जाना पड़ा।
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बीएचयू पहुंचे योगेंद्र यादव ने रोके जाने पर अधिकारियों से न जाने का प्रशासनिक कारण पूछा, जिस पर उन्हें बताया गया कि ऐसा डीएम का आदेश है। अपने को यूजीसी का पूर्व मेंबर बताते हुए अंदर जाने की बात कही लेकिन सफल नहीं हो पाए।
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उन्होंने बताया कि यूजीसी के नियमानुसार विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के अधिकार सहित अन्य नियमों का क्या-क्या पालन होना चाहिए, उसकी प्रति देने कुलसचिव को देने आया हूं। मुझे रोका जाना गलत है। उन्होंने मीडिया से कहा कि इस बारे में कुलसचिव से बात हो गई थी, उन्होंने आने की बात कही थी।
यह पूछे जाने पर कि विजयादशमी के दिन यहां दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी एलडी गेस्ट हाउस आए थे। योगेंद्र ने कहा कि वह सरकारी दामाद हैं, मै नहीं हूं। दुर्भाग्यवश जो सरकार का दामाद होता है वह विश्वविद्यालय का भी दामाद होता है। सरकार और विश्वविद्यालय अलग नहीं है न। इसीलिए उन्हें नहीं रोका गया।