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वाराणसी में जिंदगी से खिलवाड़: नकली कोरोना वैक्सीन और टेस्टिंग किट बरामद, अन्य राज्यों में सप्लाई के लिए बना गिरोह ने रखा था नेटवर्क

Wed, 02 Feb 2022 10:09 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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गिरफ्तार आरोपी। - फोटो : अमर उजाला
जीवन से खिलवाड़ कर नकली कोविशील्ड वैक्सीन और नकली कोविड टेस्टिंग किट, रेमडेसिवीर तैयार कर बेचने वाले गिरोह का एसटीएफ वाराणसी इकाई ने भंडाफोड़ किया है। बुधवार की सुबह लंका के रोहित नगर कॉलोनी स्थित एक मकान में छापा मारकर एसटीएफ ने इस कार्य में लिप्त पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

आरोपियों के कब्जे से विभिन्न राज्यों में भेजे जाने वाली नकली टेस्टिंग किट, नकली कोविशील्ड वैक्सीन, नकली जाइकोव डी वैक्सीन, रेमडेसिवीर, पैकिंग मशीन, खाली वायल, स्वाब स्टिक बरामद हुई। इसकी अनुमानित कीमत चार करोड़ रुपये आंकी गई है।
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गिरफ्तार आरोपी - फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ वाराणसी इकाई के अपर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह के अनुसार नकली कोविड किट और वैक्सीन बनाने और बिक्री की सूचनाएं मिलने के बाद फील्ड यूनिट की टीम ने लंका थाना के रोहित नगर कालोनी स्थित एक फ्लैट में छापा मारा, जहां से नकली दवाओं की खेप के संग सिगरा के सिद्धगिरीबाग निवासी राकेश थवानी, चौक थाना के पठानी टोला निवासी संदीप शर्मा, नई दिल्ली स्थित मालवीय नगर निवासी लक्ष्य जावा, बलिया के रसड़ा थाना अंतर्गत नागपुर निवासी शमशेर और मंडुवाडीह थाना के लहरतारा बौलिया निवासी अरुणेश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया।
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गिरफ्तार आरोपी और बरामद नकली वैक्सीन। - फोटो : अमर उजाला
पूछताछ के दौरान आरोपी राकेश थवानी ने एसटीएफ को बताया कि वह पिछले छह माह से संदीप शर्मा, अरुणेश विश्वकर्मा व शमशेर के संग मिलकर नकली वैक्सीन व टेस्टिंग किट बनाता था और नई दिल्ली निवासी लक्ष्य जावा को सप्लाई करता था, जो अपने नेटवर्क के जरिए अलग-अलग राज्यों में सप्लाई करता था। 

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जांच करते डिशनल एसपी विनोद कुमार सिंह। - फोटो : अमर उजाला
फेल साबित हुई लंका पुलिस
लंका थाना के नरिया जैसे इलाके में इतने बड़े पैमाने पर नकली दवाओं को तैयार करने का धंधा चल रहा था और पिछले छह माह से लंका पुलिस, एलआईयू और औषधि विभाग को भनक तक नहीं लग सकी। विवादित जमीन की पंचायत और हाइवे पर सेटिंग गेटिंग में उलझी रहने वाली लंका पुलिस यदि किरायेदारों के सत्यापन में तेजी लाती तो शायद छह माह पूर्व ही मामला पकड़ में आता।
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बरामद नकली कोरोना वैक्सीन
वहीं एलआईयू की सतर्कता पर भी सवाल खड़ा हो गया। वहीं औषधि विभाग की टीम जो गली-गली में खुले लैब और मेडिकल स्टोर पर आसानी से पहुंचती है उसका भी छह माह तक अंजान बने रहना लोगों को गले से नीचे नहीं उतर रहा है। 
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