भगवान अपने भक्तों के प्रेम पर कब रीझ जाएं, कैसे रीझ जाएं कोई नहीं जानता। सरल और सहृदय नाथों के नाथ भगवान जगन्नाथ भक्तों के कल्याणार्थ गुरुवार को बीमार पड़ गए और अज्ञातवास पर चले गए। 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ अब भक्तों को दर्शन नहीं देंगे। भगवान को अब काढ़ा पिलाया जाएगा और स्वस्थ होने के बाद वह भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे। उनके साथ रथ पर सवार होंगे बड़े भैया बलभद्र और बहन सुभद्रा। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा पर जगन्नाथ जी, सुभद्रा जी एवं बलभद्र जी की स्नान यात्रा से काशी के पहले लक्खा मेले की शुरुआत हो गई। रात्रि के तीसरे प्रहर में तीनों विग्रहों को जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह की छत पर उत्तर पूर्व दिशा में स्थित स्नान वेदी पर आसीन कराया गया।
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भगवान भाष्कर की प्रथम रश्मि के साथ ही मंदिर के पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने विग्रहों की विधिवत पूजा अर्चना एवं मंगला आरती उतारी। इसके बाद शापुरी परिवार एवं मंदिर के ट्रस्टियों ने पंच पल्लव मिश्रित गंगा जल के 108 कलश से तीनों विग्रहों को स्नान कराया। तत्पश्चात पुष्प, आम्र पत्र एवं अशोक पत्र से आच्छादित पट को भक्तों के दर्शनार्थ एवं जलाभिषेक के लिए खोल दिया गया।
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दोपहर में भगवान को पूड़ी, सब्जी, पेड़ा, मालपुआ आदि का भोग लगाया गया और आरती के पश्चात मंदिर का पट बंद कर दिया गया। मध्याह्न तीन बजे पट खुलने के बाद पुन: तीनों विग्रहों की आरती उतारी गई एवं जलाभिषेक पुन: प्रारंभ किया गया।
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शाम छह बजे पुन: दूध, मिश्री, किशमिश और अन्य फलादि का भोग लगाकर आरती उतारी गई। इसके बाद फिर जलाभिषेक आरंभ हुआ जो रात नौ बजे तक चला। शयन आरती के बाद पट बंद कर दिए गए। इस दौरान मंदिर और परिसर की फूलों और रंग-बिरंगे विद्युत झालरों से आकर्षक सजावट की गई थी। भजन-कीर्तन का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।
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भगवान जगन्नाथ के बीमार पड़ने के बाद उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए काली मिर्च, लौंग, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, जायफल, खांडसारी एवं तुलसी पत्र से निर्मित काढ़े का भोग लगाया जाता है। इसी काढ़े को भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। 15 दिनों बाद आषाढ़ कृष्ण अमावस्या को भगवान स्वस्थ होंगे तो उन्हें परवल का जूस पिलाया जाएगा।
13 जुलाई को शाम चार बजे तीनों विग्रह को सजा कर पालकी में रखा जाएगा और बाजे गाजे के साथ अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ की भव्य शोभायात्रा निकलेगी। इसी के साथ तीन दिवसीय रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ हो जाएगा।