मंगलवार को जिलेभर में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। शहर से गांव तक जमकर अबीर-गुलाल उड़े। रंग-बिरंगे चेहरे और लाल-पीले, हरे रंगों से सने कपडे़ पहनकर निकली युवाओं की टोली दिनभर धमाल मचाती रही।
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बलीपुर में एक दुसरे को रंग गुलाल लगाकर होली मिलती महिलाएं।
- फोटो : pratapgarh
शहर में तेलिया चौराहे पर लगे डीजे पर झूमते युवा राहगीरों को रंग से सराबोर कर रहे थे। दोपहर में धूप निकलने के बाद रंग खेलने वाले युवाओं को जोश देखते ही बन रहा था। शाम को लोग घर-घर जाकर एक-दूसरे से गले मिले। शुभकामना देने का दौर देर रात तक चलता रहा। पुलिस की सतर्कता के चलते कहीं से भी किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं है।
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रिफ्यूजी कालोनी में होली पर संगीत की धुन पर थिरकते लोग।
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सुबह मौसम सर्द होने से रंग खेलने का दौर दोपहर में शुरू हुआ और शाम चार बजे तक चलता रहा। शाम को अबीर-गुलाल लगाकर लोग एक-दूसरे से गले मिले और होली की शुभकामनाएं दीं। होली मिलने के लिए आने वाले लोगों की गुझिया और पकवान से मेहमाननवाजी हुई।
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पुलिस लाइन के समीप होली के रंग में रंगे बहुरूपिया बने युवा।
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शहर के तेलिया चौराहे पर लगे डीजे पर युवा मस्ती भरे रंग में झूमते नजर आए तो चौक, निर्मल तिराहा, भगवाचुंगी, श्यामबिहारी गली, श्रीराम तिराहे, पंजाबी मार्केट में निकली युवाओं की टोली को जो मिला, उसी को रंग और अबीर-गुलाल से सराबोर कर दिया। सुबह आसमान में बादल होने और हल्की ठंड का एहसास होने से रंग चलने का दौर ग्यारह बजे के बाद प्रारंभ हुआ और शाम चार बजते ही थम गया। इसके बाद एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर गले मिलने का दौर प्रारंभ हुआ।
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भंगवा चुंगी चौराहे पर कपड़ा फाड़ होली के दौरान संगीत की थुन पर थिरकते लोग।
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होली पर सर्दी, 3.5 करोड़ लीटर पानी की बचत
आसमान में बादल और अचानक तापमान में गिरावट आने से इस बार लोगों ने रंगों के साथ होली खेलने के बजाए अबीर-गुलाल से होली खेलना अधिक पसंद किया। इसका फायदा यह हुआ कि जिले में होली पर करीब 3.5 करोड़ लीटर पानी की बचत हुई। हालांकि इतना ही लीटर पानी रंग, कपडे़ और घर साफ करने में खर्च हो गया।
होली पर ठंड पड़ने से सुबह लोग पानी वाली होली खेलने से बचते रहे। 11 बजे के बाद होली का हुड़दंग शुरू हुआ तो भी मौसम सर्द था। ऐसे में लोगों ने पानी
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चिलबिला में होली की हुड़दंग करने निकले लोग।
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और रंगों से होली खेलने के बजाए गुलाल लगाना अधिक पसंद किया। कुछ लोगों ने दोपहर में रंग खेला। शाम होते ही फिर अबीर-गुलाल लेकर निकले और एक-दूसरे को लगाने के बाद गले मिलकर त्योहार की शुभकामना दी।
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सदर बाजार में होली की हुड़दंग करते युवा।
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जलनिगम के अधिशासी अभियंता जीएस द्विवेदी ने बताया कि होली पर औसतन प्रति व्यक्ति 20 लीटर पानी रंग खेलने, नहाने और कपड़े साफ करने में खर्च हो जाते है, मगर इस वर्ष त्योहार पर सर्दी होने और बूंदाबांदी के चलते औसतन प्रति व्यक्ति दस लीटर पानी की बचत हुई है। 35,14,659 आबादी वाले जिले में करी 3.5 करोड़ लीटर पानी की बचत हुई है। उन्होंने बताया कि आधा पानी नहाने, कपड़े धोने और घर की सफाई में खर्च हो जाता है, मगर फिर भी तापमान में गिरावट होने से पानी की बर्बादी पर काफी हद तक रोक लगी है।
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पंजाबी कालोनी में पानी के फौव्वारे में रंग खेलती महिलाएं।
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नगरपालिका में पानी की घटी डिमांड
होली के दिन नगरपालिका कर्मी टैंकर से पानी पहुंचाने में हांफ जाते थे, मगर इस वर्ष पानी की डिमांड ही नहीं हुई। कपूर चौराहे पर टैंकर में रंग घोलकर लोगों को रंगा जा रहा था। हालांकि सुबह ठंड होने से करीब ग्यारह बजे होली का हुड़दंग शुरू हुआ और तीन बजते ही थम गया। अन्य मुहल्लों में भी पानी की मांग नहीं बढ़ी। हालांकि नगरपालिका कर्मी पूरी तक अलर्ट रहे।
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बाबागंज में होली की हुड़दंग करते लोग।
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कोरोना का दिखा खौफ
शहर और ग्रामीण इलाकों में होली के दिन कोरोना का खौफ देखने को मिला। चीन से आने वाले रंग में कोरोना के वायरस होने की अफवाह होने से अधिकांश लोग रंग से बचने का प्रयास करते रहे। हालांकि अबीर-गुलाल खूब उड़ा और देर शाम तक चलता रहा।
भंगवा चुंगी चौराहे पर होली के गाने पर झूमते लोग।
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भगवाचुंगी में हुई कपड़ा फाड़ होली
शहर के भगवाचुंगी चौराहे पर कपड़ाफाड़ होली हुई। डीजे पर थिरकने वाले युवाओं ने रंग खेलते समय एक-दूसरे के कपड़े फाड़ दिए और बिजली के तारों के ऊपर फेंक दिया। हालांकि कपड़ों को ऊपर फेंकने में भी होली खेलने वालों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।