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बारिश और बाढ़ ने गांवों में मचाई तबाही: फसलें हुईं बर्बाद, चिंता में डूबे किसान, तस्वीरों में देखें मौके का हाल

Fri, 22 Oct 2021 04:30 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ, मुजफ्फरनगर
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बारिश से फसलें हुईं बर्बाद। - फोटो : amar ujala
उत्तराखंड में बेमौसम बारिश से गंगा में आए उफान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। खादर क्षेत्र के दस गांवों के सैकड़ों किसानों की सब्जी की फसल बर्बाद हो गई है। गन्ने के खेतों में पानी भरा है। जलस्तर अभी भी खतरे के निशान पर है, जिससे किसानों की मुश्किलें आने वाले दिनों में भी कम होने के आसार कम ही है। 

रामराज क्षेत्र के जीवनपुरी, रामपुर ठकरा, उजाली कलां, उजाली खुर्द, सिताबपुरी, नया गांव, खैर नगर, मजलिसपुर, हंसावाला समेत करीब 10 गांव के किसानों के लिए गंगा का पानी मुसीबत बन गया है। 

जीवनपुरी के किसान संजीव कुमार का कहना है कि गन्ने के खेत में पानी भरा है। सब्जी की फसल बर्बाद हो गई है। लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
किसान धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि प्रशासन ने फसलों को बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं। किसानों की समस्या को कोई समझने के लिए तैयार नहीं है।
किसान प्रदीप कुमार का कहना है कि सब्जी की फसल बर्बाद होने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। अभी पानी उतरने की कोई संभावना नहीं है।
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बाढ़ से फसलें बर्बाद। - फोटो : amar ujala
इन फसलों को हुआ नुकसान
गन्ना, परमल, मूली, गोभी, गाजर समेत अन्य फसलों को नुकसान हुआ है।

प्रशासन ने नहीं की सुनवाई 
भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकारिणी सदस्य आशीष शर्मा का कहना है कि प्रशासन के अधिकारियों को जानकारी दी गई थी। जलस्तर बढ़ने और फसलों के नुकसान की जानकारी दी, लेकिन अभी तक क्षेत्र में कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने जरूर किसानों की समस्या सुनी है।
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जानकारी देता युवक। - फोटो : amar ujala
रामपुर ठकरा के रास्तों पर भर गया पानी
गंगा खादर के गांव रामपुर ठकरा के आने जाने के रास्ते बंद हो गए हैं। ग्रामीण सिर्फ ट्रैक्टरों पर सवार होकर ही यहां पहुंच रहे हैं। 

सब्जियों के दाम आसमान पर
बारिश के बाद सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंचने शुरू हो गए हैं। गोभी का भाव 60 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है, जबकि तीन दिन पहले 45 रुपये प्रति किलो का भाव था। पालक का भाव 20 रुपये बढक़र 50 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। अन्य हरी सब्जियों के दाम भी बढ़ गए हैं।

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बारिश के बाद फैला कचरा। - फोटो : amar ujala
प्रशासन कराएगा नुकसान का आंकलन
एसडीएम जानसठ जयेंद्र कुमार का कहना है कि पानी उतरते ही किसानों के नुकसान का आंकलन कराया जाएगा। प्रशासन जलस्तर पर निगाह रखे हुए हैं। बाढ़ चौकियों भी अलर्ट पर हैं।
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बारिश से फसल बर्बाद। - फोटो : amar ujala
गंगा का जलस्तर घटा, किसानों की दिक्कतें बढ़ीं
उधर, हस्तिनापुर में गंगा के जलस्तर में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके चलते खादर क्षेत्र के कई गांवों में भरा पानी कुछ कम हो गया है। लेकिन ग्रामीणों की दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। खेत और संपर्क मार्गों पर अभी तक पानी भरा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर बिजनौर बैराज पर 94 हजार क्यूसेक पर आ गया है। 

क्षेत्र के गांव दबखेड़ी, लतीफपुर, भीमकुंड, किशनपुर के बाहरी छोर पर पानी भरा हुआ है। कई गांव से पानी निकल कर जंगल में पहुंच गया है। हालांकि टूटे तटबंध से अभी तक पानी खादर क्षेत्र में आ रहा है। जब तक गंगा का पानी बाहर आता रहेगा, खादर क्षेत्र में जंगल जलमग्न रहेंगे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जलस्तर बुधवार के मुकाबले कम है। 
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बाढ़ से भरा पानी। - फोटो : amar ujala
सोती नदी उफान पर
खादर क्षेत्र में जल स्तर में गिरावट आने से पानी गांव से जंगल में पहुंच गया है। इसके चलते सोती नदी उफान पर है। सोती नदी के सहारे पानी गंगा की धारा में आगे की ओर पहुंच रहा है। लतीफपुर के प्रधान दिलदार सिंह ने बताया कि उनके गांव के कई घरों में पानी भरा है। भीकुंड पुल पर जाने वाली सड़क उनके गांव के लिए खतरा साबित हो रही है। इस सड़क पर बड़ी-बड़ी पुलियों का निर्माण होना चाहिए।
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बाढ़ से भरा पानी। - फोटो : amar ujala
खेतों से सिल्ट भरने से फसल बर्बाद
गंगा के पानी के साथ आई सिल्ट क्षेत्र के किसानों की बर्बादी का कारण बन रही है। धान, गन्ना और चारे की फसल पर सिल्ट जम जाने से फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। इसकी वजह से किसानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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