पांच बार सपा के जिलाध्यक्ष रहे गोपाल सिंह यादव ने मुलायम सिंह से जुड़े संस्मण को साझा किया। कहा नेता जी को उड़द की धुली दाल और मिस्सी रोटी काफी पसंद थी। साथ में ताजा मक्खन और मठ्ठा भी उनके खाने में शामिल था। गोपाल सिंह के मुताबिक नेता जी 1984 में पहली बार मेरे कटघर गाड़ीखाना स्थित आवास पर आए थे। गुलजारीमल धर्मशाला जीएमडी रोड में बैठक की थी। इस बैठक में चौधरी चंद्रपाल सिंह, शांति देवी और रमाशंकर कौशिक शामिल हुए थे। नेता जी का घर खाना पसंद था। वह जब भी मुरादाबाद आए मेरे घर का बना खाना ही खाया। कभी घर पर तो कभी सर्किट हाउस या गेस्ट हाउस में मंगाकर खाया।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
गोपाल सिंह यादव बताते हैं कि उन्हें प्रदेश सचिव से प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बना दिया गया था। जिसपर उन्होंने दिल्ली जाकर नेता जी से नाराजगी जताई थी। मेरी बात सुनने के बाद नेता जी ने कहा था, ‘नेता का विश्वास बड़ा होता है, पद नहीं’, मेरा तुम पर विश्वास है।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
सिक्योरिटी के दस हजार रुपये गोपाल जमा करेगा
गोपाल सिंह यादव ने बताया कि 1998 के संभल लोकसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया मुरादाबाद में ही हुई थी। उस वक्त दस हजार रुपये सिक्योरिटी के तौर पर जमा होते थे।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
जब इस धनराशि को जमा करने की बारी आई तो नेता जी ने कहा था कि सिक्योरिटी मनी गोपाल जमा करेगा। खुद और दो डमी प्रत्याशियों की सिक्योरिटी मनी मुझसे ही जमा कराई थी।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
जनसंघ नेता भी कायल थे मुलायम के शिष्टाचार के
एमएच कॉलेज के प्रबंधक एवं संस्कार भारती के महानगर अध्यक्ष डॉ. काव्य सौरभ जैमिनी ने बताया कि मुलायम सिंह आपातकाल के बाद कैबिनेट मंत्री बने थे। उस समय हमारे खालसा सराय आवास पर भोजन किया था, जबकि मेरे पिता स्व. डॉ. विश्व अवतार जैमिनी जनसंघ एवं भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शुमार थे।
उन्होंने दादी को ढूंढा और आशीर्वाद लिया। उनके इस शिष्टाचार से पिता बहुत प्रभावित हुए। पिता जी ने मुलायम सिंह की इस सदाश्यता का जिक्र अपनी आत्मकथा बिंदु-बिंदु सिंधु में किया है। लिखा कि राजनैतिक विचारों में मुलायम सिंह का विरोधी होते हुए भी मैं उनके शिष्टाचार का आज भी कायल हूं।