flood moradabad
- फोटो : अमर उजाला
कमोबेश यही स्थिति गांव निवासी अफसाना, सादत, सुखदेयी, जाबिर हुसैन, भूरा, राहत, साबिर, चुन्नीलाल, मदन, ओमप्रकाश, लाला सिंह, गेंदन, बाबू, नन्हें, विजय, सोमपाल समेत सौ से अधिक परिवारों की दिखाई दी। इन परिवारों के लोगों में कोई छत पर भीगे अनाज, कपड़े, फर्नीचर व अन्य भीगा सामान सुखाता मिला तो कोई घरों में बाढ़ के पानी के साथ आई गीली मिट्टी को हटाने की कोशिश में जुटा था। सभी ऊपर वाले से दुआ कर रहे थे कि अब फिर बारिश न आए। वरना उन्हें सूखने के लिए डाला गया समान तक समेटना मुश्किल हो जाएगा। पीड़ित परिवारों ने बताया कि दो दिन तक उन्हें भूखे-प्यासे रात गुजारनी पड़ी। कुछ ने बताया कि वह लोग गांव के पीछे बसे हैं लिहाजा अगर कोई कर्मचारी गांव में राहत के लिए आता भी है तो सड़क से ही लौट जाता है। उन असल पीड़ितों तक तो कुछ पहुंचता ही नहीं।