मतगणना भले ही 10 मार्च को होगी, लेकिन समीकरणों पर चौपालों से नुक्कड़ों तक बहस तेज है। मतदान प्रतिशत, किसके मतों में बिखराव और कौन एकजुट हुआ, इसके कयास लगाए जा रहे हैं। आमजन के साथ सरकारी कर्मचारियों, दिव्यांगों और बुजुर्गों के मतों को भी अहम फैक्टर माना जा रहा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में डाक मतपत्रों ने ही मामूली अंतर वाली कई सीटों पर आखिरी वक्त में नतीजे ही बदल दिए थे। इस बार भी सबकी निगाह डाक मतपत्रों पर है।
सहारनपुर के जेवी जैन डिग्री कॉलेज के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. प्रविंद्र मलिक का कहना है कि मेरठ-सहारनपुर मंडल की अधिकांश सीटों पर इस बार मुकाबला भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच रहा। मतदाताओं ने प्रत्याशी के बजाए पार्टी को वोट किया। मतदाताओं के बीच चुनाव में स्थानीय मुद्दे गौण रहे। ऐसे में डाक मतपत्र भी बेहद अहम हैं।