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प्राचीन पांडव टीले पर उत्खनन जारी: अब खुदाई में निकली सुराही, हांडी और टेराकोटा के बर्तन, देखें तस्वीरें

Tue, 22 Feb 2022 06:50 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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हस्तिनापुर में उत्खनन। - फोटो : amar ujala
मेरठ जनपद के हस्तिनापुर में प्राचीन पांडव टीला पर पुरातत्व विभाग की ओर से चल रहे उत्खनन में मिट्टी की सुराही मिली है। इसके साथ ही टेराकोटा के बर्तन, हांडी, प्राचीन पत्थर, पकी ईंट और प्राचीन मकानों की दीवारों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इन्हें पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने जांच के लिए सुरक्षित कराया है। 

पांडव टीले पर तीन स्थानों पर ट्रेंच लगाए गए हैं। इनमें दो आसपास है। तीसरा ट्रेंच पुरातत्व विभाग कार्यालय के पास लगाया गया है। यहां पर मिल रहे अवशेषों का अध्ययन किया जा रहा है। इस ट्रेंच से सोमवार को कई अवशेष मिले हैं। कई दिनों से चल रहे खुदाई कार्य में कई प्राचीन मिट्टी के बर्तन मिल चुके हैं। वहीं नोएडा के पुरातत्व संस्थान से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने भी अधिकारियों की मौजूदगी में अध्ययन किया। उन्हें मिट्टी की परतों में छिपे इतिहास को पहचाने की जानकारी दी गई। 
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हस्तिनापुर। - फोटो : amar ujala
सफर में होता था सुराही का प्रयोग
नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रियंक भारती ने बताया कि इस प्रकार की छोटी सुराही का प्रयोग ऐतिहासिक काल के लोग सफर में करते थे। इसे रस्सी में बांधकर गले में टांगकर रखा जाता था। जैसे-जैसे खुदाई नीचे की ओर जाएगी कई ऐतिहासिक अवशेष पुरातत्व विभाग को प्राप्त होंगे।
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हस्तिनापुर में उत्खनन। - फोटो : amar ujala
खुदाई कार्य देखने पहुंच रहे पर्यटक
हस्तिनापुर में रोज सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। सोमवार को पहुंचे कई पर्यटक पांडव टीले पर उत्खनन की सूचना मिलने पर खुदाई कार्य देखने पहुंच गए। 

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उत्खनन। - फोटो : amar ujala
बाढ़ ने उजाड़ा था प्राचीन हस्तिनापुर
प्राचीनकाल में हस्तिनापुर पर प्रलयकारी बाढ़ ने कई बार कहर बरपाया। इस बात के साक्ष्य पांडव टीले के उत्खनन में सामने आ रहे हैं। खुदाई में निकल रही मिट्टी बाढ़ और आग लगने की कहानी बयां कर रही है। इन रहस्य से पर्दा उठाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम लगी है। 
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उत्खनन देखते लोग। - फोटो : amar ujala
खुदाई के दौरान हस्तिनापुर के कई बार उजड़ने व बसने के प्रमाण मिले हैं। अमृत कूप के पास खुदाई में मिट्टी देखकर आशंका जताई जा रही है कि गंगा लंबे समय तक यहां से होकर बही। कछुआ और मछली के अवशेष भी इस ओर इशारा कर रहे हैं। वर्तमान में गंगा नदी प्राचीन हस्तिनापुर से करीब पांच किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में बह रही है। अभी तक मिले अवशेष इशारा कर रहे हैं कि हस्तिनापुर कई बार नष्ट हुआ और कई बार बसाया गया। उत्खनन में आग में जली हुई कुछ हड्डियों के अवशेष भी मिले हैं। 

पुराणों में भी जिक्र 
पुराणों में भी कहा गया है कि गंगा की बाढ़ के कारण पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर बार-बार नष्ट हुई। इसके बाद पांडव हस्तिनापुर छोड़कर कौशाम्बी चले गए थे।
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