सरहद पर शहीद होने वाले जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए युवक ने देशभक्ति का जुनून दिखाया। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए जवानों के नाम युवक ने अपनी पीठ पर गुदवा दिए। युवक का कहना है कि देश भक्ति का जजबा बचपन से ही रग-रग में भरा हुआ है। उसका बड़ा भाई भी देश की सेवा कर रहा है। शनिवार को शहीदों को इंसाफ दिलाने के लिए दिल्ली में धरना दिया जाएगा।
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pulwama attack
मूलरूप से शामली जनपद के भारसी गांव के रहने वाले विजय शुक्रवार को खेकड़ा में अपने रिश्तेदार के घर पहुंचा। रिश्तेदार के घर के पास शरीर पर नाम गोदने वाले का घर है। उसने पुलवामा में शहीद हुए जवानों के नाम अपने शरीर पर गुदवाने की बात अपने रिश्तेदार से कही। रिश्तेदार उसे पड़ोस में शरीर पर नाम गोदने वाले के पास लेकर गए। उसने पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए 42 जवानों के नाम अपनी पीठ पर गुदवा दिए।
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pulwama attack
पीठ पर सबसे पहले लिखवाया कि पुलवामा के शहदों को श्रद्धांजली। उसके बाद शहीदों के नाम पीठ पर गुदवाए। विजय ने बताया कि उसकी रग रग में देश प्रेम भरा हुआ है। उसका बड़ा भाई विक्की पंवार फौजी है। उसने अपने भाई से देश प्रेम सीखा है। पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों की शहादत को नमन करता हूं। सरकार शहीदों को इंसाफ नहीं दे रही है। नेता राजनीति कर रहे है।
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martyred crpf jawans
शहीद जवानों को अभी तक शहीदों का दर्जा तक नहीं दिया है। पीड़ित परिवारों को न तो धनराशि दी गई और न ही उनके जख्मों पर मरहम लगाने प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री पहुंचे। शहीद को सच्ची श्रद्धांजली देने के लिए उसने अपने शरीर पर शहीदों के नाम गुदवाए है। ताउम्र उसके शरीर पर शहीदों के नाम रहेंगे। शनिवार को शहीदों को इंसाफ दिलाने के लिए इंडिया गेट दिल्ली पर धरना दिया जाएगा।
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letter
- फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री को लिखा था खून से पत्र
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 15 फरवरी को आतंकी हमले में 42 जवान शहीद हो गए थे। जिसको लेकर देश में गम व गुस्सा है। अपने शरीर पर शहीदों का नाम गुदवाने वाले विजय निवासी भारसी जनपद शामली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि शहीदों को इंसाफ नहीं मिला तो देश के युवा आंदोलन छेड़ देंगे।
सबसे पहले जिमाल का नाम गुदवाया
भारसी के रहने वाले विजय ने शरीर पर मुस्लिम समुदाय के शहीदों के नाम गुदवाने से शुरूआत की। सबसे पहले लिखवाया जिमाल सिहं, उसके बाद नसीर अहमद, सुखविंदर सिंह, रोहिताश लांबा, तिलंक राज, भगीरथ सिंह, बिरेंद्र सिंह, अवदेश यादव, नितिन राठौर, रतन ठाकुर, सुरेंद्र यादव, संजय सिंह सहित 42 शहीदों के नाम पीठ पर गुदवाए।