फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहादत को सलाम : देश के लिए कुर्बान हुआ मेरठ का लाल, अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब, मासूम बेटे ने दी मुखाग्नि

Mon, 19 Jul 2021 03:33 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 5
जवान का फाइल फोटो, दस साल का बेटा और अंतिम यात्रा में उमड़े लोग - फोटो : Amar Ujala Meerut
जम्मू-कश्मीर में तैनात मेरठ के रजपुरा का 30 वर्षीय लाल रोहित सिवाच रविवार को शहीद हो गया। चार जुलाई को ड्यूटी के दौरान अंगीठी में ब्लास्ट होने पर रोहित बुरी तरह से झुलस गए थे। उनका दिल्ली के अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका पार्थिव शरीर मेरठ पहुंचा तो श्रद्धांजलि देने के लिए लोग उमड़ पड़े। कमिश्नरी आवास चौराहे पर अंतिम दर्शन के लिए भीड़ जुट गई। भगत लाइंस से पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। सैन्य सम्मान के साथ जवान का गांव में अंतिम संस्कार किया गया।

रोहित 2011 में सेना में भर्ती हुए थे। उनके पिता लोकेश सिवाच भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। राइफलमैन रोहित जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। परिजनों के अनुसार चार जुलाई को अधिकारियों ने रोहित के झुलसने की जानकारी दी थी। उन्हें इलाज के लिए दिल्ली स्थित आरआर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता लोकेश और परिवार के लोग अस्पताल में ही थे। रविवार सुबह रोहित ने अंतिम सांस ली। मेरठ के लाल की शहादत की सूचना मिलते ही रजपुरा और आसपास के क्षेत्र में मातम छा गया। सुबह से लोग उनके आवास पर पहुंचने शुरू हो गए। दोपहर ढाई बजे दिल्ली से पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से भगत लाइन लाया गया।
विज्ञापन

2 of 5
अंतिम यात्रा में उमड़े लोग - फोटो : Amar Ujala Meerut
गूंजे भारत माता के जयकारे, हर आंख हुई नम 
कमिश्नरी चौराहे पर हजारों की संख्या में लोग तिरंगे और रोहित के नाम के बैनर लेकर खड़े थे। पार्थिव शरीर पहुंचा तो भारत माता के जयकारे गूंजने लगे। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, रोहित तेरा नाम रहेगा’ की गूंज सुनाई देने लगी। सैकड़ों लोग वाहनों पर तिरंगा लेकर चल रहे थे। शाम पांच बजे गांव के श्मशान में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। रोहित के तीन साल के बेटे विवान ने मुखाग्नि दी।
विज्ञापन

3 of 5
विलाप करते शहीद के परिजन व बेटे को गोद में लिए पिता - फोटो : Amar Ujala Meerut
मेरे लाल...  तू तो छोटे बेटे का चेहरा भी नहीं देख पाया
शहीद रोहित का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो पत्नी अमरेश चौधरी और मां कुसुम का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। दोनों बेसुध हो गईं। मां बार-बार बस यही बोल रही थी कि एक महीने पहले ही घर में बच्चे के रूप में खुशियां आईं थीं, लेकिन सब कुछ लुट गया। वो बस यही बोलती रही कि मेरा लाल अपने छोटे बेटे का चेहरा भी नहीं देख पाया।

4 of 5
जवान के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा युवाओं का सैलाब - फोटो : Amar Ujala Meerut
रोहित की शादी यूपी पुलिस में कांस्टेबल अमरेश चौधरी से हुई थी। अमरेश की तैनाती नौचंदी थाने में है। रोहित का बड़ा बेटा विवान तीन साल का है। चार जुलाई को जलने से 10 दिन पहले ही दूसरा बच्चा हुआ था। छह महीने पहले रोहित छुट्टी आए थे, इसके बाद उनको छुट्टी नहीं मिली। दूसरे बेटे के जन्म की खबर सुनकर वे बहुत खुश थे। पत्नी और मां से कहा था कि छुट्टी मिलते ही आऊंगा।

उन्होंने बच्चे का नाम प्रिंस रखने को कहा था। बेटे के जन्म के 10 दिन बाद वे हादसे का शिकार हो गए। पिता लोकेश और रोहित का छोटा भाई दीपांशु भी बेसुध हो गए। पिता रोते हुए कहते रहे कि मेरा तो सहारा ही चला गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
जवान के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा युवाओं का सैलाब - फोटो : Amar Ujala Meerut
अंतिम संस्कार के दौरान ये रहे मौजूद
अंतिम संस्कार के दौरान गंगानगर, सलारपुर, रजपुरा, कसेरूबक्सर, अम्हैड़ा आदि गांवों के हजारों लोग शामिल रहे। किठौर विधायक सत्यवीर त्यागी, पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, मास्टर बीरबल सिंह, अरुण पूनिया, युवा कांग्रेस मेरठ के जिलाध्यक्ष युगांश राणा, डॉ. केपी सिंह, अजीत चौधरी, संजीव शर्मा, सजल गुप्ता, शेरा जाट और सीओ ब्रजेश सिंह मौजूद रहे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें