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UP: 200 वर्ष पुराने इस चर्च में है माता मरियम की चमत्कारिक तस्वीर, हर मुराद करती है पूरी

Tue, 07 Nov 2023 02:19 PM IST
Dimple Sirohi शाह आलम त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
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सरधना चर्च - फोटो : अमर उजाला
मेरठ से सटे सरधना में स्थित ऐतिहासिक रोमन कैथलिक चर्च जिसको बेगम समरू द्वारा बनवाया गया था वह अपने दो सौ एक साल पूरे चुका है। यह चर्च श्रद्धालुओं की आस्था, भव्यता और कला के बेजोड़ नमूूने को संजोए हुए है। बीते दो सौ साल से इस चर्च को ईसाई धर्म के लोग कृपाओं की माता मरियम का तीर्थस्थान मानते हैं।
 
इस ऐतिहासिक चर्च के कारण ही सरधना का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकता है। मेरठ मुख्यालय से करीब बीस किलामीटर दूर सरधना में ऐतिहासिक चर्च सौहार्द, आस्था और कलात्मक इतिहास का भव्य नमूना है।
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सरधना चर्च। - फोटो : amar ujala
ऐतिहासिक और चमत्कारी रोमन कैथोलिक चर्च जहां पर हर साल दुनिया भर से विभिन्न जाति-धर्मों के लोगों को माता मरियम और प्रभु यीशु की आस्था खींच लाती है। इस खूबसूरत और भव्य चर्च का निर्माण एक ताकतवर मुस्लिम महिलाओं में शुमार महारानी बेगम समरू ने कराया था।
 
बेगम समरू के द्वारा बनवाए गए इस चर्च को पोप जॉन 23वें ने 1961 में माइनर बसिलिका का दर्जा दिया था। खास बात यह है कि ऐतिहासिक और भव्य गिरिजाघरों को ही यह दर्जा प्राप्त होता है।
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begum samru - फोटो : अमर उजाला
बेगम समरू ने जब यह गिरजा घर बनवाया था तो उनकी इच्छा थी कि वे इस पाक इमारत को प्रभु यीशु की मां मरियम की शान में समर्पित करें। मगर उन्होंने कभी यह ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि माता मरियम की इज्जत यहां इस तरह होगी। सरधना के ऐतिहासिक चर्च में कृपाओं की माता की वह तस्वीर मौजूद है जिसे चर्च की सबसे बड़ी शान कहकर पुकारते हैं।

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begum samru - फोटो : अमर उजाला
चर्च के निर्माण में लगा था 11 वर्ष का समय
इस चर्च को बनने में करीब 11 वर्ष का समय लगा था। चर्च के निर्माण में कई सौ कलाकार लगे थे और इसका निर्माण का कार्य वर्ष 1809 में शुरू हुआ था। इस ऐतिहासिक चर्च के खास दरवाजे पर इमारत के बनने का वर्ष 1822 दर्शाया गया है। चर्च की खास बात हैं यहां मौजूद माता मरियम की चमत्कारिक तस्वीर। बताया जाता है कि इस तस्वीर के सामने सच्चे दिल से प्रार्थना करने पर हर मुराद पूरी होती है।
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सरधना का ऐतिहासिक चर्च - फोटो : अमर उजाला
यहां मौजूद है माता मरियम की चमत्कारिक तस्वीर
बताते हैं कि इस चमत्कारिक तस्वीर को इंग्लैंड से लाया गया था। मान्यता है कि तस्वीर को जिस दिन चर्च में स्थापित किया गया उसी एक महिला ने यहां अपने बीमार बच्चे के साथ प्रार्थना की। इसके बाद महिला का बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया तभी से यहां यह चमत्कारिक तस्वीर श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाती हैं।
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सरधना चर्च। - फोटो : amar ujala
यह है चर्च की खूबसूरती को देखने का सबसे सही समय
इस तीर्थस्थान की खूबसूरती देखने के लिए नवंबर से जनवरी माह के बीच का समय सबसे बेहतर है। इस दौरान चर्च की खूबसूरती देखते ही बनती है। नवंबर माह के दूसरे शनिवार व रविवार को होने वाले कृपाओं की माता महोत्सव में देश, विदेश से आए लाखों श्रद्धालु माता मरियम की चमत्कारी तस्वीर के दर्शन कर शीश नवाकर मन्नत मांगते हैं। जिसमें प्रभु येसु को क्रूस पर लटकाए जाने की घटना को प्रतिमाओं के माध्यम से दर्शाया गया है।
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Merry Christmas, क्रिसमस, सरधना चर्च - फोटो : अमर उजाला
दो सौ साल की हुई आस्था की अटूट भव्यता
इतिहास के अनुसार सरधना का रोमन कैथोलिक चर्च का निर्माण पूरा होने में करीब 11 वर्ष का समय लगा था। चर्च के निर्माण वर्ष 1809 में शुरू हुआ था। जबकि चर्च के दरवाजे पर इमारत के निर्माण का साल 1822 दशार्या गया है। इतिहास के अभिलेखों में चर्च निर्माण का वर्ष 1820 भी बताया जाता है। हालांकि उस समय चर्च के निर्माण में हजारों लोग लगे थे। करीब चार लाख का निर्माण में खर्चा आया था।
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सरधना चर्च - फोटो : अमर उजाला
बागपत के कोताना गांव में लतीफ खां के परिवार में जन्मी फरजाना बेगम अपने सौतेले भाइयों के जुल्म से परेशान होकर मां के साथ दिल्ली चली गई थीं। उन्होंने नृत्य को अपना पेशा बना लिया। इसी दौरान उनकी मुलाकात सरधना रियासत के हुक्मरान वाल्टर रेंनार्ड समरू से हुई। रेंनार्ड समरू और फरजाना प्रेम-प्रसंग शुरू होने के बाद दोनों एक-दूसरे के हो गए। फरजाना नर्तकी से बेगम समरू बन गई। बेगम समरू द्वारा बनवाया गया था वह पिछले दो सौ एक साल पूरे हो चुके हैं।
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