पढ़ाई करते बच्चे।
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शाम को तीन बजे से चलती हैं कक्षाएं
शाम को जब शहर के सारे स्कूलों की छुट्टी हो जाती है तो इन पाठशालाओं में यस सर... यस मेम... की आवाजें सुनाई देनी शुरू हो जाती हैं। झुग्गी बस्तियों से कपड़े के थैलों में किताबें लेकर ये मासूम अपनी-अपनी पाठशाला की तरफ चल देते हैं। शुक्रवार की कक्षा में ऐसे बच्चों से रूबरू हुए तो कौन पढ़ना चाहता है, सवाल पर सबने हाथ खड़े कर लिए। हम सभी पढ़ना चाहते हैं कहकर मासूमों के चेहरे खिल गए। बच्चों ने बताया कि बड़ी मुश्किल से पढ़ने आते हैं, माता-पिता कहते हैं कि कूड़ा बीनकर लाओ तो कुछ पैसे मिलेंगे, पढ़ाई करके क्या करोगे।