दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के लिए शहर में सुरंग खोदाई के काम ने रफ्तार पकड़ ली है। जली कोठी स्थित 1936 में बनी नादिर अली बिल्डिंग को सुरक्षा की दृष्टि से सोमवार को खाली करा दिया गया। करीब 45 वर्ष से यहां रह रहे पूर्व मंत्री और विधायक शाहिद मंजूर परिवार संग किठौर चले गए हैं। वहीं एनसीआरटीसी ने कुछ परिवारों के रहने का इंतजाम होटल मेट्रो रीजेंसी में किया है। इस इलाके में सुरंग का काम होने के बाद करीब आठ दिन में इन परिवारों को अपने घरों में वापसी की अनुमति मिलेगी।
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के लिए गांधी बाग से मेट्रो प्लाजा के आगे तक करीब 5.8 किलोमीटर दूरी में सुरंग बनाने का काम चल रहा है। यह घनी आबादी वाला इलाका है। सुरंग के लिए करीब 17 मीटर गहरे तक खोदाई की जा रही है। एनसीआरटीसी ने इस इलाके में बने मकानों का पहले ही अध्ययन कर लिया था। अधिकारियों का दावा है कि सुरंग से मकानों को कोई नुकसान नहीं होगा। फिर भी एहतियात के तौर पर नादिर अली बिल्डिंग में रहने वाले परिवारों को शिफ्ट किया गया है। यह परिवार अपने साफ जरूरी वस्तुएं ले गए हैं जबकि घर का 90 फीसदी सामान बिल्डिंग में ही रखा है। एनसीआरटीसी ने खाली कराए गए मकानों की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात किए हैं। नादिर अली बिल्डिंग में रहने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यूसुफ कुरैशी, सुहैल परवेज, प्रोफेसर अब्दुल हफीज के परिवार भी चार से आठ दिनों के लिए शिफ्ट हो गए हैं।