फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांप उठा दिल: शवों की हालत देख परिजन हुए बेसुध, सीट से चिपकी थी मासूमों की लाश, कंगन-अंगूठी से हुई पहचान

Tue, 16 Apr 2024 12:39 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

कांप उठा दिल: शवों की हालत देख परिजन हुए बेसुध, सीट से चिपकी थी मासूमों की लाश, कंगन-अंगूठी से हुई पहचान
विज्ञापन
1 of 8
सीकर हादसे में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में सीकर हादसे में मारे गए दो परिवारों के सात सदस्यों के शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया। हार्दिक की पत्नी स्वाति के शव की पहचान टॉप्स, कंगन और पायल से हुई। हार्दिक की मौसी नीलम के शव की पहचान अंगूठी और बिछुए से की गई। आशुतोष के अंडरवियर का कुछ हिस्सा बचा था। उस पर टीटी लिखा हुआ था। 

वहीं, एक बच्ची के शव पीछे वाली सीट और दूसरे का शव मां से चिपका था। शवों की ऐसी हालत देखकर परिजनों की हालत खराब हो गई। अंतिम संस्कार के लिए शवों को सीधे बृजघाट ले जाया गया। वहां चिताएं जलतीं देख लोगों का कलेजा कांप गया।
विज्ञापन

2 of 8
सीकर में दर्दनाक हादसा। - फोटो : अमर उजाला
भाजपा के पूर्व विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल के साले स्वर्गीय महेश बिंदल का परिवार ब्रह्मपुरी के शिव शंकरपुरी कॉलोनी में रहता था। परिवार में बेटे हार्दिक बिंदल (40), पत्नी स्वाति बिंदल (37), बेटी सिदीक्षा (6), नितीशा (2) और मां मंजू (62) थीं। हार्दिक शारदा रोड पर देसी तड़का नाम से रेस्टोरेंट चलाते थे।
विज्ञापन

3 of 8
हादसे के बाद बुझाई गई आग - फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि शनिवार को वे शादी के बाद गठजोड़ा की रश्म के चलते परिवार के साथ दर्शन करने सीकर जीण माता के मंदिर के लिए निकले थे। उनके साथ माधवपुरम के आरकेपुरम में रहने वाली मौसी नीलम (55) व उनके बेटे आशुतोष (35) भी थे।

4 of 8
हार्दिक व उनकी पत्नी, सिदिक्षा व नितिशा - फोटो : अमर उजाला
जीण माता के दर्शन करने के बाद परिवार सालासर बालाजी के दर्शन करके लौट रहा था। सीकर जिले में फतेहपुर कोतवाली थाना क्षेत्र में कार आगे चल रहे ट्रक में घुस गई थी। जोरदार धमाके के बाद कार में आग लग गई थी। हादसे में दो युवकों, तीन महिलाएं और दो बच्चियों की जिंदा जलकर मौत हो गई।
विज्ञापन

5 of 8
नीलम, मंजू और आशूतोष - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद रविवार देर रात को परिवार के लोग सीकर पहुंच गए। सातों शवों के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया देर रात ही शुरू हो गई। वहीं, सोमवार शाम को बृजघाट श्मशान घाट पर पांच शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। दोनों बच्चियों के शवों को गंगा में प्रवाहित किया गया। दो परिवारों के सात सदस्यों का एक साथ अंतिम संस्कार होते देख हर कोई विचलित हो गया। परिचितों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। परिजनों ने सारी रस्में बृजघाट में ही पूरी कर दीं।
विज्ञापन

6 of 8
सीकर हादसे में मारे गए सात लोग - फोटो : अमर उजाला
अंतिम दर्शन तो करा दो...
शिव शंकरपुरी और माधवपुरम आरके पुरम में सुबह से ही परिचित-रिश्तेदार पहुंच गए। रात तक दोनों परिवारों के शवों के मेरठ लाने पर ही विचार किया जा रहा था। लेकिन जब सीकर पहुंच कर परिजनों ने शवों की खराब हालत देखी तो घर वालों को फोन कर बता दिया गया कि रिश्तेदारों को शाम को ब्रजघाट पहुंचने के लिए बोल दीजिए।
विज्ञापन

7 of 8
हादसे के बाद पीड़ित परिवार के घर जीड़ जमा। - फोटो : अमर उजाला
आशुतोष की पत्नी को जब पता चला कि शव सीधे ब्रजघाट ले जा रहे हैं तो उसका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वो बस यही कहती रही कि अंतिम दर्शन तो करा दो। मोहल्ले वाले और परिचित बस यही कहते रहे कि ऐसा मनहूस दिन किसी को नए दिखाए। अंतिम समय में परिवार के सदस्यों को घर की देहरी भी नसीब नहीं हुई।

यह भी पढ़ें: भयावह मंजर: न थम रहे आंसू न रुक रहीं सिसकियां, मासूमों सहित जिंदा जल गए थे सात लोग, घटना से हर कोई सहमा
विज्ञापन

8 of 8
मृतकों का घर। - फोटो : अमर उजाला
ब्रजघाट श्मशान घाट पर देर शाम साढ़े सात बजे हार्दिक, उनकी माता, पत्नी के शव को मुखाग्नि हार्दिक के मामा ने दी। आशुतोष और उनकी माता नीलम के शव को पिता मुकेश गोयल ने मुखाग्नि दी। इस क्षण को देखकर हर रिश्तेदार-परिचित रो पड़ा। हार्दिक के घर पर उनकी ताई की हालत बिगड़ गई। आशुतोष की पत्नी पारुल और बहन नेहा रोते-रोते बदहवास हो गईं। आशुतोष के चार साल के मासूम बेटे विनायक को देखकर हर कोई यही कहता रहा कि इसको तो मालूम ही नहीं कि पिता का साया उठ गया। इतने बड़े गम दुख को परिवार कैसे झेलेगा।

यह भी पढ़ें: Meerut: नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारी को जूते-चप्पल से पीटा, पीड़ित ने एसएसपी को दिखाया वीडियो, कार्रवाई की मांग
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें