मां का रो-रोकर बुरा हाल है। मां ऊषा कहती हैं कि आर्मी वाले आ रहे हैं। मेरे बेटे केतन से मेरी बात तो करवा दो। मेरा इकलौता लाल, पता नहीं उसे कितनी चोट लगी है। मेरा मन नहीं मान रहा। मेरी आंखें सूख चुकी हैं। कोई है जो मेरे बेटे से बात करवा दे। इस बीच आर्मी अफसर कहते हैं कि माताजी, केतन शर्मा ठीक हैं। उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है। उन्हें चोट लगी है, वैसी कोई बात नहीं है।