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खनन का खेल, जमीन से 20 फीट ऊपर ट्यूबवेल, अफसरों से साठगांठ कर सरकार को ही बेच दी मिट्टी

Wed, 05 Feb 2020 11:45 AM IST
Dimple Sirohi शरद गुप्ता, अमर उजाला, मेरठ
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mining mafia, soil mafia - फोटो : अमर उजाला
मेरठ से सटे दौराला खनन माफिया सरकारी तंत्र के साथ साठगांठ कर कितने बेखौफ होकर मिट्टी खनन कर रहे हैं, इसका उदाहरण दौराला-सुरानी मार्ग पर नजर आ जाएगा। यहां सरकारी जमीन में न केवल खनन किया गया बल्कि 20 फीट से ज्यादा खनन करते हुए सरकारी ट्यूबवेल को ही जमीन से 20 फीट ऊपर टांग दिया। यही नहीं ट्यूबवेल की सरकारी नाली का अस्तित्व भी अब कहीं नजर नहीं आ रहा है। खनन करने वाले ट्यूबवेल के कमरे और नालियों की ईंटों को भी उठाकर साथ ले गए।
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mining mafia, soil mafia - फोटो : अमर उजाला
दरअसल दौराला-सुरानी मार्ग पर खसरा नंबर 210 में सिंचाई विभाग की सरकारी ट्यूबवेल है, जो राजस्व अभिलेखों में आज भी नक्शे में दर्ज है। इस ट्यूबवेल की नालियां कई किसानों के खेतों से होकर गुजर रही थी। जिसके जरिए खेतों में खड़ी फसलों की सिंचाई होती थी। लेकिन कुछ साल पहले जलस्तर कम हो जाने के कारण ट्यूबवेल ने पानी उगलना बंद कर दिया। लेकिन सिंचाई विभाग ने इसे रिबोरिंग कराना उचित नहीं समझा। तभी से यह ट्यूबवेल बंद पड़ी थी।
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mining mafia, soil mafia - फोटो : अमर उजाला
पहले हुआ सरकारी जमीन पर कब्जा
सिंचाई विभाग के इस सरकारी ट्यूबवेल की तरफ कोई ध्यान न दिए जाने के कारण पड़ोस के किसान ने इसका फायदा उठाया और ट्यूबवेल के लिए बने कमरे की ईंटें निकाल लीं। यहीं नहीं सिंचाई नालियों र्की इंट भी निकालकर इस ट्यूबवेल का अस्तित्व पूरी तरह खत्म कर दिया।

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mining mafia, soil mafia - फोटो : अमर उजाला
अब चंद ईंटों का खंडहर जो कि ट्यूबवेल पंप का बेस था वह और बोरिंग का पाइप ही नजर आता है। इसके बाद माफिया ने ट्यूबवेल के आसपास लगभग 20 फीट गहरी व 7 फीट चौड़ाई में मिट्टी का खनन कर मिट्टी को बेचना शुरू कर दिया। इसको लेकर शिकायत भी की गई। लेकिन अधिकारियों की चुप्पी के कारण माफिया के हौसले बुलंद हो गए। 
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अवैध मिट्टी खनन - फोटो : अमर उजाला
सरकार को बेच दी मिट्टी
मिट्टी का खनन करने के बाद माफिया ने चालाकी से सरकारी विभाग को ही मिट्टी बेच दी। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार खनन करने वाले ने रेलवे लाइन के दोहरीकरण के दौरान मिट्टी भराव का ठेका लिया और किसान से साठगांठ कर इस सरकारी जमीन की मिट्टी का खनन करके सरकारी काम में ही मिट्टी को बेच दिया।
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