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मेरठ में अस्पतालों का हाल: भर्ती होना है तो अपनी ऑक्सीजन लेकर आओ... सबूत हैं ये तस्वीरें

Sat, 24 Apr 2021 12:51 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेडिकल कॉलेज की इमजजेंसी के बाहर आधे घटें से एंबुलेंस में ही रहा मरीज। भर्ती न होने पर परिजन वापस ले गए। संवाद - फोटो : amar ujala
मेरठ में कोरोना से जनता के बचाव के प्रशासन के सारे दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों के लिए न बेड है न ही ऑक्सीजन। कोरोना उपचार के लिए बनाए गए अस्पतालों में प्रभारियों के नंबर या तो बंद हैं या उठाए नहीं जाते। अस्पतालों में हालात बदतर हैं। अस्पतालों ने मरीजों से कहना शुरू कर दिया है कि अपना सिलिंडर लाओ और भर्ती हो जाओ।
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मेरठ में ऑक्सीजन की किल्लत। - फोटो : amar ujala
प्रशासन ने 30 अस्पतालों को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए तय किया है। अस्पतालों के पास पहले बेड का अभाव था, लेकन अब ऑक्सीजन की भी कमी है। अस्पतालों के अनुसार संक्रमण बढ़ने के कारण मरीजों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि सभी बेड फुल हैं। वहीं ऑक्सीजन की खपत भी तेजी से बढ़ी है। पहले जिस अस्पताल में 200 ली. ऑक्सीजन की खपत थी अब वहां रोजाना 500 ली. से ज्यादा ऑक्सीजन खपत हो रही है।

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मेरठ में ऑक्सीजन की किल्लत। - फोटो : amar ujala
ऑक्सीजन की सप्लाई भी नहीं मिल रही है। मरीज अस्पताल में आते हैं, लेकिन समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल रही। कई अस्पताल तो साफ कह रहे हैं मरीज के साथ ऑक्सीजन ले आएं, भर्ती कर लेंगे।

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ऑक्सीजन के लिए मची मारामारी। - फोटो : amar ujala
कोविड अस्पतालों के प्रभारियों के नहीं उठते फोन
कोरोना उपचार के लिए जो 30 अस्पताल तय हुए हैं उनमें आलम यह है कि अस्पताल प्रभारियों के फोन ही नहीं उठ रहे। अधिकांश अस्पतालों के प्रभारियों के नंबर बंद हैं या किसी ने नंबर फारवर्ड कर दिए हैं। तीमारदार परेशान हो रहे हैं। जहां फोन उठता है वहां भर्ती करने से साफ इनकार कर दिया जाता है।
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ऑक्सीजन के लिए मची मारामारी। - फोटो : amar ujala
प्रति मरीज बढ़ गई ऑक्सीजन खपत
ऑक्सीजन की कमी का एक कारण प्रति मरीज ऑक्सीजन की खपत बढ़ना भी है। चिकित्सकों के अनुसार जो मरीज पहले 15 ली. ऑक्सीजन पर थे अब उन्हें 20 ली. ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। कोरोना की दूसरी लहर में वायरस तेजी से फेफड़ों पर वार कर रहा है। इसके चलते मरीज का ऑक्सीजन स्तर पिछले बार की अपेक्षा तीव्रता से गिर रहा है, इसलिए ऑक्सीजन की खपत भी बढ़ी है।

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