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'द्रौपदी' इस कुएं के पानी से करती थी स्नान, कौरवों की राजधानी में आज भी मौजूद हैं ये अमृत कुआं

Mon, 14 Jan 2019 03:20 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला
महाभारत का जिक्र हो और हस्तिनापुर का नाम न आए, ऐसा नहीं हो सकता। जी हां, हस्तिनापुर कौरवों की राजधानी थी। यही नहीं बल्कि इसे धर्मनगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां हर साल देश-विदेशों से लाखों पर्यटक घूमने आते हैं। आइए आज हम आपको द्रौपदी के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएंगे, जिन्हें जानकर आपको भी हैरानी होगी।
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पांडवेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
ये जानने से पहले आपको बता दें कि महाभारतकालीन पांडव टीला और दूसरे ऐतिहासिक स्थल आज भी क्रांतिधरा मेरठ में मौजूद है। हस्तिनापुर में पांडव टीले पर एक कुआं बना है, जिसके बारे में एक ऐसी सच्चाई बताई जाती है। जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। तो आइए अगली स्लाइड में जानते हैं कि आखिर क्या है वह सच्चाई...!
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पांडवेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
ऐसा बताया जाता है कि इस कुएं के पानी से ही द्रोपदी और पांडव स्नान करते थे। कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर से जुड़ी और भी कई ऐसी जानकारियां हैं, जिन्हें आज हम आपको आगे की स्लाइडों में बताएंगे।

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औघड़नाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
1857 की महासंग्राम क्रांति के लिए तो मेरठ फेमस है ही लेकिन, इसके अलावा मेरठ जनपद और भी कई ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता है। जैसै- कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर, सरधना का ऐतिहासिक चर्च, औघड़नाथ मंदिर और शहीद स्मारक आदि मौजूद है।
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हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि यहां एक टीले पर आज भी वो कुआं मौजूद है, जिसके पानी से पांडव व द्रौपदी स्नान करते थे। दिलचस्प बात यह है कि इस कुएं को देखने देश नहीं बल्कि विदेशों से पर्यटक यहां आते हैं।
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हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला
वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि पांडव टीले पर बने इस कुएं को लोग अमृत कुएं के नाम से जानते हैं। इस कुएं का जीर्णोद्वार कराया गया है, इसका निचला हिस्सा लाखौरी ईंटों से बना है।
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पांडवेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
वहीं पुरातत्व विभाग ने इस स्थान को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है। इस टीले तक पहुंचने के लिए पाण्डेश्वर महादेव मंदिर से रास्ता गया है। इसी रास्ते से पैदल चलकर यहां तक पहुंचा जा सकता है।

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प्राचीन पांडवेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर में एक प्राचीन पांडवेश्वर महादेव मंदिर भी स्थित है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यह अपने अंदर महाभारत काल के इतिहास को संजोए हुए हैं। इस मंदिर परिसर में कई सौ सालों पुराने दो विशालकाय पेड़ है।
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पांडवेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
ऐसी मान्यता है कि यहां पर पांडव और भगवान श्रीकृष्ण खेलते थे। मंदिर में स्थित शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग बताया जाता है।

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