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यूपी: अफसरों के दावों की खुल रही पोल, अस्पतालों में खाली नहीं हैं बेड, तड़प रहे मरीज, तस्वीरें

Tue, 11 May 2021 02:46 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
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मेरठ में इलाज के लिए बेड नहीं मिल रहे। - फोटो : amar ujala
अफसर अस्पतालों से मरीजों को वापस नहीं लौटाए जाने का दावे कर रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। निजी कोविड अस्पतालों में अब भी मरीजों को बेड नहीं है कहकर टाला जा रहा है। सोमवार रात नौ बजे शहर के तमाम अस्पतालों में एक कोविड मरीज को भर्ती कराने के लिए फोन किया, लेकिन अधिकतर ने बेड नहीं है... कहकर फोन काट दिया। कई अस्पतालों के दिए गए नंबर पर कई-कई बार कॉल करने पर फोन नहीं उठा। ऐसे में सवाल ये है कि इन अस्पतालों की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है... 

सोमवार को मेरठ में प्रदेश में सबसे अधिक मरीज मिले हैं। इससे दहशत का माहौल है। अधिकतर लोग मजबूरी में घर में रहकर ही मरीजों का इलाज करा रहे हैं। एक कोविड मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए शहर के तमाम अस्पतालों का रियल्टी चेक किया तो अधिकतर जगह से ना सुनने को मिला। 
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मेरठ में इलाज के लिए नहीं मिल रहे बेड। - फोटो : amar ujala
कई बार कॉल की गई, लेकिन किसी ने नहीं उठाया
एसडीएस ग्लोबल अस्पताल में बताया गया कि बेड नहीं है। आनंद अस्पताल में फोन किए जाने पर कहा गया कि देखकर बताना पड़ेगा। न्यूटिमा अस्पताल के दिए गए नंबर पर कई बार कॉल की गई, लेकिन किसी ने नहीं उठाया। संतोष अस्पताल में फोन किए जाने पर पहले पूछा गया कि आपको नंबर कहां से मिला है। मरीज कहां का है, आदि पूछे जाने के बाद कहा गया कि बाद में फोन कीजिए। आर्यव्रत अस्पताल के दिए गए नंबर पर कई बार कॉल करने पर भी फोन नहीं मिला। 
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मेरठ में इलाज के लिए बेड नहीं मिल रहे। - फोटो : amar ujala
आईआईएमटी अस्पताल का नंबर भी रिसीव नहीं हुआ। धनवंतरि अस्पताल से साफ कह दिया गया कि अभी कोई बेड खाली नहीं है। कैलाशी अस्पताल कंकरखेड़ा में बताया गया कि अभी कोई बेड नहीं है। अजय अस्पताल में पूछा गया कि आप कहां से बोल रहे हैं। उनको हापुड़ से बताए जाने पर कहा गया कि हमको पहले मेरठ के मरीज भर्ती करने के आदेश हैं। इसके अलावा भर्ती करने से पहले डॉक्टर देखेंगे तब ही कुछ बता पाएंगे। दूसरे कई अस्पतालों में भी ऐसे ही जवाब मिले। 

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मेरठ में इलाज के लिए नहीं मिल रहे बेड। - फोटो : amar ujala
घर पर ही मरीज रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं
कई अस्पतालों के दिए गए नंबर उठे ही नहीं। जब अस्पताल प्रबंधन की तरफ से ऐसे लोगों के नंबर दिए गए हैं जो उठाते ही नहीं हैं तो इनका मतलब क्या है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर फिर इन नंबरों की सूची लोगों को भेजकर क्यों उनका समय खराब करा रहे हैं। इन तमाम सवालों के जवाब किसी भी अफसर के पास नहीं हैं। हकीकत सामने है कि अगर किसी का मरीज गंभीर है तो उसको कहीं बेड मिल जाए तो ठीक नहीं तो घर में रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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मेरठ में अस्पतालों के बाहर तड़प रहे मरीज। - फोटो : amar ujala
बिना ऑक्सीजन बेड के 30 हजार रुपये वसूले, हंगामा
शहर के अस्पतालों में अवैध वसूली के मामले कम नहीं हो रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल मरीजों से एक दिन का 30 से 50 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। गढ़ रोड स्थित अस्पताल में बिना ऑक्सीजन बेड के 30 हजार रुपये वसूलने को लेकर हंगामा हो गया। सपा नेता पवन गुर्जर ने बताया कि उनके परिचित रोहटा रोड निवासी मुन्नू की मां शिमला गढ़ रोड स्थित अस्पताल में लगभग 24 घंटे एडमिट रहीं। ऑक्सीजन न होने की वजह से उन्हें शिफ्ट किया गया। अस्पताल ने सिर्फ एक दिन का बिल 30 हजार रुपये बना दिया। सपा नेता और मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन का विरोध किया। सेक्टर मजिस्ट्रेट चंद्रेश कुमार से शिकायत की गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने बिल में 20,000 रुपये कम कर उन्हें छुट्टी दी। वहीं, जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर अवगत कराया गया कि कुछ निजी अस्पताल जनता को पूरी तरह लूट रहे हैं। मरीजों के इलाज में घर के जेवरात तक बिक रहे हैं। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में भी खर्च के मानक तय किए जाएं।

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