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मेरठ: शहीद मेजर मयंक विश्नोई की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार, देखें तस्वीरें

Sun, 12 Sep 2021 07:30 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

शहीद मेजर मयंक विश्नोई की अंतिम यात्रा में रविवार शाम को जनसैलाब उमड़ पड़ा। सूरजकुंड पर गमगीन माहौल में उनका अंतिम किया गया। इस दौरान सभी की आंखों से आंसू निकल रहे थे।
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शहीद मेजर मयंक को नम आंखों से दी अंतिम विदाई। - फोटो : amar ujala
जम्मू कश्मीर के शोपियां में शहीद हुए मेरठ के मेजर मयंक विश्नोई का पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक आवास पर पहुंचा, यहां से शहीद अंतिम यात्रा सूरजकुंड पहुंची। इसके बाद गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान वहां मौजूद सभी की आंखों में आंसू आ गए।

वहीं शहीद के स्वागत की तैयारी में कंकरखेड़ा के व्यापारी, समाजसेवी और राजनैतिक दल के लोग सुबह से ही जुट गए थे। पुष्प और राष्ट्रीय ध्वज बाजारों में लगाए गए हैं। हिंडन एयर बेस से सड़क मार्ग द्वारा दोपहर बाद शहीद मेजर मयंक का पार्थिव शरीर मेरठ पहुंचा। वहीं इससे पहले हिंडन एयर बेस पर केंद्रीय मंत्री व स्थानीय सांसद वी के सिंह ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।

जैसे ही शहीद मेजर मयंक का पार्थिव शरीर कंकखेड़ा उनके आवास पर पहुंचा, परिवार में कोहराम मच गया। वहीं गली में लोगों की इस कदर भीड़ नजर आई कि पांव रखने की भी जगह नहीं बची। हर कोई शहीद के अंतिम दर्शन के लिए बेताब दिखा। यहां से शहीद की अंतिम यात्रा सूरजकुंड के लिए रवाना हुई। इस दौरान लोग हाथ फूल लेकर अपने घरों की छतों पर खड़े रहे। घरों के गेट पर खड़ी महिलाओं ने फूल बरसाकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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शहीद मेजर मयंक विश्नोई की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला
दरअसल शोपियां में 27 अगस्त को हुई एक आतंकी मुठभेड़ में मेजर मयंक विश्नोई के सिर में गोली लग गई थी। वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत उधमपुर के सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिजनों को जैसे ही उनके घायल होने की सूचना मिली तो वे उधमपुर पहुंच गए। जिसके बाद उनके माता पिता व बहनें वापस आ गईं थीं लेकिन पत्नी स्वाति उनके साथ ही रुक गईं थी। शनिवार को मेजर मयंक ने सैनिक अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली।
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शहीद मेजर मयंक विश्नोई - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ के शहीद मेजर मयंक बिश्नोई को श्रद्धांजलि देते हुए परिवार को 50 लाख की मदद, एक सदस्य को सरकारी नौकरी व एक सड़क का नामकरण शहीद मयंक बिश्नोई के नाम पर करने की घोषणा की है।

प्रदेश प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, मेरठ से भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल, भाजपा विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल, भाजपा विधायक दिनेश खटीक, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल भी शहीद मेजर मयंक विश्नोई के घर पहुंचे।

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शहीद मेजर मयंक विश्नोई की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला
शामली निवासी विजय हिंदुस्तानी ने भी शहीद मेजर मयंक के आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। विजय हिंदुस्तानी ने अपनी पीठ पर 183 शहीदों के नाम के टैटू बनवाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि मेजर मयंक की शहादत के बाद उनका नाम भी वह पीठ पर बनवाएंगे।
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शहीद मेजर मयंक विश्नोई - फोटो : अमर उजाला
पिता बोले, मेरा लाडला चला गया
शहीद मयंक विश्नोई के पिता वीरेंद्र व मां मधु शाम साढ़े सात बजे उधमपुर से घर पहुंचे। मां-बाप के आंसु थम नहीं रहे थे। उनके आते ही घर में पड़ोसियों की भीड़ लग गई। पिता का कहना था कि मेरा बेटा बहादुर था। अब वह चला गया, लौटकर नहीं आएगा। अब उसका हंसता चेहरा और उसके मुंह से निकलने वाला पापा शब्द मुझे कभी सुनाई नहीं देगा। उन्होंने बताया कि 24 अगस्त को मयंक से अंतिम बार बात हुई थी। 
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शहीद मेजर मयंक विश्नोई - फोटो : अमर उजाला
मां पर टूटा दुखों का पहाड़ 
मां मधु विश्नोई बदहवास हालत में हैं। महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही हैं, लेकिन उनकी आंखों से आंसु थम नहीं रहे हैं। वह बार-बार कह रही थीं कि मयंक लौटकर आ जा मेरे लाल। हमें ऐसे ही छोड़कर क्यों चला गया। तेरे बिना हमारा मन नहीं लगेगा।
 
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शहीद मेजर मयंक विश्नोई की बहनें - फोटो : अमर उजाला
बड़ी बहन तनु कहती हैं कि मयंक जब भी आता तभी कहता कि क्या दीदी सिरदर्द की गोली खाती रहती हो, गोली खानी है तो देश के लिए खाओ। दोनों बहनें भाई की शहादत की खबर सुनकर बेड पर गुमसुम बैठी रहीं।

कभी एक दूसरे से लिपटकर रोने लगतीं ता कभी मोबाइल पर भाई की फोटो को एकटक देखकर आंखों से आंसू पौंछने लगती। दोनों बहनों को भाई की शहादत पर गर्व है लेकिन भाई के जाने के दुख ने उन्हें तोड़ दिया है। 
 
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शहीद मेजर मयंक विश्नोई - फोटो : अमर उजाला
मेजर मयंक हर ऑपरेशन में सबसे आगे रहते थे। उनकी वीरता के लिए उन्हें शौर्य चक्र मिला, लेकिन उन्होंने अन्य सेना अधिकारी को दान कर दिया। परिजनों के मुताबिक एक सैन्य अधिकारी सेवानिवृत्त हो रहे थे। उनके सम्मान में मेजर मयंक ने अपना शौर्य चक्र उन्हें दे दिया। 14 अगस्त को सेना मेडल की सूची के 30वें नंबर पर मेजर मयंक का नाम एक बार फिर स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया।
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