shiv temple
कंधों पर शिवलिंग लेकर चलते थे पुजारी
जिला गजिटियर कहता है कि बिजनौर भार शैव की भूमि रही है। ये भार शैव भगवान शंकर के पुजारी थे। ये अपने कंधे पर शिवलिंग लेकर चलते थे।यहां के शिव मंदिर के शिवलिंग भी प्राचीन और अलग तरह के हैं। साहनपुर के मोटामहादेव का शिव लिंग भी अलग है। गंज के घाट पर स्थित निगमागम महाविद्यालय का शिवालय बहुत पुराना है। शिव लिंग काफी ऊंचा है। मंदिर के अंदरूनी भाग में परिक्रमा का घेरा भी बना है। मंदिर के अंदर विभिन्न धार्मिक चित्र बने हैं। माना जाता है कि ये चित्र मुगलकालीन कला के हैं।
इसी प्रकार का शिवालय शेरकोट का भी है। इसमें भी परिक्रमा की व्यवस्था है। नांगल सोती के शिव मंदिर में तो शिवलिंग तीनमुखी है। उसमें मुख की आकृति बनी हुई। यहीं का गंगाघाट जाने वाले गंगा मंदिर की प्राचीनतम इसी से पता चलती है कि लगातार जल प्रवाह के कारण शिव लिंग में काफी बड़ा छेद हो गया है।