दिव्या काकरान
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दिव्या का मूल गांव पुरबालियान है। इस समय पिछले 15 साल से वह परिवार के साथ दिल्ली रहती है। वह रेलवे में टीटी हैं। 21 वर्षीय दिव्या ने फोन पर हुई बातचीत में बताया, पापा ने मुझे बताया कि मैं स्पेशल हूं। मेरा जन्म देश के लिए हुआ है। गांव में कोई रोजगार नहीं था। वह मुझे दिल्ली लेकर आए और मेरा प्रशिक्षण शुरू कराया। हम लोगों ने बहुत तंगहाली में दिन बिताए। मेरे पापा-भाई दंगल लड़ने जाते थे। मैं भी लड़कों के साथ दंगल लड़ती थी। जो ईनाम मिलता, उससे घर चलाने में मदद होती थी। मां जांघिया लगोट बनाती और पिता बेचते थे। आज भी यही काम करते हैं। गांव में सब कहते थे, अरे, बेटी से पहलवानी मत करा।