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यूपी: ये हैं कलयुग के श्रवण कुमार, माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से लाए गंगाजल

Sun, 28 Jul 2019 03:27 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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माता पिता को कावड़ में बैठाकर लाए युवक - फोटो : अमर उजाला
यूपी के शामली में कांवड़ यात्रा के दौरान रविवार को अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां पानीपत निवासी चार भाई अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचे हैं। वहीं इन भाइयों के सेवाभाव और हिम्मत की हर कोई दाद दे रहा है। उनकी कांवड़ की हर कोई तारीफ कर रहा है। 
 
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माता पिता को कावड़ में बैठाकर लाए युवक - फोटो : अमर उजाला
आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के लिए अपना तन-मन-धन सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं। फिर भले ही उन्हें अपने माता-पिता को श्रवण की ही तरह पालकी में बैठाकर पैदल तीर्थ क्यों न कराना पड़े।

 
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माता पिता को कावड़ में बैठाकर लाए युवक - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के पानीपत की विद्या राम कॉलोनी निवासी सत्येंद्र निरंजन, पप्पन, और तेजवीर ये चारों भाई श्रवण कुमार की तरह अपने माता पिता को कावड़ में बैठाकर गंगाजल लेकर हरिद्वार से आए हैं। चारों भाइयों का कहना है कि वे सभी भाई संयुक्त रूप से एक ही परिवार में रहते हैं। ये सभी ट्रांसपोर्ट कंपनियों में माल लोडिंग का काम करते हैं। इसी से इनके घर परिवार का गुजारा चलता है। 

 

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माता पिता को कावड़ में बैठाकर लाए युवक - फोटो : अमर उजाला
संयुक्त परिवार में रहते हैं सभी
इनका कहना था कि संयुक्त रूप से रहते हुए उनके घर में हर खुशी है। सभी भाई माता पिता की बहुत सेवा करते हैं। घर की इसी खुशहाली के लिए वह अपने माता-पिता को कावड़ में बैठाकर गंगाजल साथ ले कर हरिद्वार से आए हैं। शामली में इन लोगों का जगह-जगह शहरवासियों ने स्वागत किया। वहीं शहर के इंडस्ट्रियल एरिया के उद्यमियों ने इन्हें रोक कर उनका स्वागत किया और उनके खाने-पीने की व्यवस्था और सेवा की ।
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माता पिता को कावड़ में बैठाकर लाए युवक - फोटो : अमर उजाला
पानीपत के रहने वाले चार भाइयों का भी सपना था कि वह अपने मां-बाप को ऐसी ही धार्मिक यात्रा कराए। इस बार कांवड़ यात्रा में इन्होंने अपना यह सपना पूरा किया। वहीं माता पिता ने भी बेटे के इस प्रण की खूब सराहना की और उसे भरपूर आशीष दिए। 

उनका कहना है कि वह बारी-बारी से कांवड़ उठाते हैं। इनका मानना है कि इस दुनिया में मां-बाप की सेवा से बढ़कर कोई और दूसरा धर्म नहीं हैं। ये सभी न सिर्फ तारीफ का काम कर रहे हैं बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन रहे हैं। 
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