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हाशिमपुरा कांड: मरा समझ नहर में फेंक दिया था... 5 चश्मदीदों ने बयां किया आंखों देखा दर्द

Wed, 31 Oct 2018 07:03 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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गोली के जख्म तो भर गए, मगर जो गम है वह कम नहीं हुआ है। गोली के निशान उन्हें आज भी उस दर्द का एहसास कराते रहते हैं। बुधवार को फैसले का इंतजार था। फैसला सुना तो हाशिमपुरा कांड में जीवित बचे पांच लोगों के आंसू निकल आए। 22 मई 1987 का पूरा वाकया उनकी आंखों के सामने ताजा हो गया।
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यह पांच लोग हैं, उस्मान, जुल्फिाकर, नईम, बाबूदीन और मुजीबुर्रहमान। इन सब की उम्र उस समय 17 से 25 साल के बीच थी। उस्मान पावरलूम चलाते थे। मगर अब मजदूरी करने को मजबूर हैं। यह कहते हुए उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने बताया कि पीठ में गोली लगने के बाद पीएसी वालों ने उन्हें नहर में फेंक दिया था और वह वहीं पड़े रहे। वह बेहोश हो गए थे, उन्हें मरा हुआ समझकर पीएसी वाले चले गए।
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इसके बाद उन्हें होश आया और वह वहां से निकले। अस्पताल में गोली निकाली गई और वह बच गए। जुल्फिकार की बगल के नीचे गोली लगी है। वह ट्यूबवेल के स्पेयर पार्ट्स बनाते हैं। नईम, बाबूदीन और मुजीबुर्रहमान के भी पीठ और सीने में गोलियां लगी थीं और नहर में डाल दिए गए थे। वह बच गए थे, मगर पीएसी वालों को उन्होंने यह दर्शाया कि वह मर गए हैं, इस तरह वह बचकर वहां से निकले थे। बाबूदीन और मुजीबुर्रहमान का परिवार यहां नहीं रहता है, यह दोनों दरभंगा बिहार के रहने वाले हैं।

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हालांकि लंबे समय से यहीं रहते हैं। दोनों पावरलूम चलाते हैं, जबकि नईम कपड़ों की फेरी लगाते हैं। पांचों कोर्ट के इस फैसले से खुश हैं कि किसी रूप में उन्हें न्याय मिल गया है। हालांकि वह फांसी की उम्मीद लगाए हुए थे। उनका कहना है कि जो जिल्लत, परेशानी और गम उन्होंने और उनके परिवार ने झेला, उसकी भरपाई नहीं हो सकती है, लेकिन इस फैसले से खुशी मिली है।
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बाबूदीन ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
बाबूदीन ने ही गाजियाबाद के लिंक रोड थाने में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद हाशिमपुरा कांड पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। रिपोर्ट में लिखाया था कि उन्हें ट्रक में भरकर दिल्ली रोड पर मुरादनगर गंगनहर पर ले गए थे। ट्रक से उतारकर लोगों को गोली मारने के बाद एक एक करके गंगनहर में फेंका गया था, जबकि कुछ लोगों को ट्रक में गोलियां बरसाकर ट्रक को गाजियाबाद हिंडन नदी पर ले गए और उन्हें हिंडन नदी में फेंक दिया था।
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शौहर की मौत हुई, तो मायके पाकिस्तान चली गई बीवी
हाशिमपुरा कांड में तीन लोग ऐसे थे, जिनकी बीवियां उनकी मौत के बाद अपने मायके चली गईं थीं और उन्होंने फिर से अपनी नई जिंदगी शुरू की थी। एक थे अशरफ, जिनकी बीवी उनकी मौत के बाद मायके चली गई थी।
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दूसरे नईम थे, जिनकी शादी पाकिस्तान में हुई थी। उनकी एक बेटी भी थी, उनकी गमजदा बीवी बेटी के साथ मायके पाकिस्तान चली गई थी। तीसरे थे कमरुद्दीन, जिनकी पत्नी ने उनकी मौत के बाद ससुराल छोड़कर चली गई थी।

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