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विश्व नगर दिवस: मेरठ में मौजूद है महाभारत, मुगलकाल से लेकर अंग्रेजी हुकूमत तक का इतिहास

Wed, 31 Oct 2018 04:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
धर्म से लेकर इतिहास तक और प्रकृति से लेकर शौर्य गाथाओं तक मेरठ के स्थल खास हैं। इनके पास जाकर वक्त गुजारें तो इनकी गाथा, कथा सुनाई देगी। एक बार मेरठ घूमकर तो देखिए, यहां पांडवों का मंदिर और 1857 की क्रांति का इतिहास से आपका साक्षात्कार होगा :-
 
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ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
1857 की क्रांति के लिए मशहूर मेरठ भले ही सरकारी पर्यटन के नक्शे पर नहीं, लेकिन सैर सपाटे के जितने ठोर ठिकाने यहां हैं, उतने शायद आसपास नहीं मिलेंगे। जिसका जैसा मन हो, घुमक्कड़ी का वैसा भ्रमण किया जा सकता है। धर्म से लेकर इतिहास तक और प्रकृति से लेकर शौर्य गाथाओं तक यहां के स्थल खास हैं। इनके पास जाकर वक्त गुजारें तो इनकी गाथा, कथा सुनाई देगी। एक बार मेरठ घूमकर तो देखिए, यहां लंकापति रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी के पतिव्रता धर्म से आपका साक्षात्कार होगा। महाभारत से लेकर 1857 की क्रांति का इतिहास आपसे बोलेगा। आज विश्व नगर दिवस है और मेरठ के ये सारे स्थान और स्मारक इस मौके पर आपको बुला रहे हैं।
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ऐतिहासिक संग्रहालय

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
48 किमी दूर हस्तिनापुर कुरु जनपद की राजधानी और हस्तिनापुर जैन धर्म की नगरी है। यहां आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का पारणा स्थल है। तीर्थकरों में शांतिनाथ, कुन्थुनाथ व अरहनाथ का जन्म, दीक्षा व कैवल्य ज्ञान भी यहीं हुआ। उल्टा खेड़ा नाम से मशहूर विदुर का टीला भी यहीं है, जिसमें मृदभाण्ड के अलावा मुगलकाल के अवशेष मिलते हैं। जैन मंदिर, प्राचीन पांडेश्वर मंदिर, द्रोपदेश्वर मंदिर व कर्ण मंदिर भी देखने लायक हैं।

ये भी स्थल हैं प्रमुख

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
ऐतिहासिक संग्रहालय भी दर्शनीय स्थल है। इसमें बरनावा से मिली सूर्यमूर्ति, मिट्टी की मुद्राएं, टेराकोटा मोहरें, पाषाण कालीन गहने, कॉपर का टुकड़ा, मुगलकालीन पॉटर, प्राचीन सिक्के, हड्डी से बने आभूषण देखने मिलेंगे। जम्बूद्वीप, श्वेताम्बर जैन निशियां व कल्याणक मंदिर, श्वेतांबर जैन मंदिर प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। बस या लोकल वाहन के द्वारा आसानी से यहां पहुंच सकते हैं और रुकने के लिए जैन धर्मशालाओं में निशुल्क व्यवस्था है। 
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यहां मौजूद हैं सौ साल पुराने वृक्ष

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
मेरठ शहर घंटाघर, विक्टोरिया पार्क, कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा बनवाई गई शाही ईदगाह, जामा मस्जिद, नौचंदी मैदान के पास स्थित मां चंडी देवी मंदिर, बाले मियां की मजार, शाहपीर का मकबरा, खैर उल मस्जिद, खैरनगर दरवाजा, नवाब खैरंदेश खां का मकबरा, तीर्थंकार शांतिनाथ मंदिर तीरगरान, जेलचुंगी स्थित जेम्स व्हाइट का स्मारक,  150 वर्ष पुराना गंगा मंदिर, गंगा मंदिर कागजी बाजार, गंगा मंदिर पैड़ामल, उत्तर भारत का पुराना सेंट जोंस चर्च, लेखानगर स्थित सेंट जॉन कब्रिस्तान जहां आज भी 1857 की क्रांति मे मारे गए अंग्रेजों की कब्रें हैं।
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बाबा औघड़नाथ मंदिर, मेरठ

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भाई धर्मसिंह का गुरूद्वारा हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला
वेस्टर्न रोड स्थित कर्नल कारमाईकल स्मिथ बंगला कैं टोनमेंट, माईल स्टोन कैंटोनमेंट, वेस्टर्न रोड साउथ एंड रोड के तिराहे पर स्थित बंगला नंबर 141 जो मिसेज चैम्बर्स का बंगला था। ब्रिटिश कालीन कंपनी बाग, इसे गांधी बाग के नाम से भी जाना जाता है। हर्बल पौधों के अलावा यहां 100 वर्ष पुराने कई वृक्ष आज भी यथावत खड़े हैं। म्यूजिकल फाउंटेन, स्टेडियम भी है। परीक्षितगढ़ का गांधारी का तालाब, केसरगंज की पुरानी जेल, सिटी रेलवे स्टेशन के पास परेड ग्राउंड, दिल्ली रोड के समीप केसरगंज मंडी से दूरी पर स्थित अबू का मकबरा, सूरजकुंड पार्क भी देखने लायक है। 
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प्राचीन विल्ववेश्वर मंदिर मेेरठ

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
1857 की क्रांति का गवाह कैंट स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर पर्यटन का अच्छा स्थान है। इसे कालीपलटन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शंकर का यह मंदिर1857 की लड़ाई में पैदल सैनिकों की लाइनों में स्थित था। जहां मंदिर के पुजारी ने सिपाहियों को विवादित कारतूसों के प्रयोग के खिलाफ भड़काया था। मंदिर में आज भी शहीद स्तंभ बना है, जहां प्रतिवर्ष 10 मई शहीद दिवस को श्रृद्धांजलि सभा होती है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र कालीपलटन मंदिर में सावन महीने मे कांवड़ लेकर भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करने लाखों की संख्या में आते हैं।

प्राचीन कालीन पांडव मंदिर, चर्च भी देखने लायक

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
कैंट सदर में स्थित विल्ववेश्वर मंदिर का निर्माण मराठा शासकों ने कराया था। मंदिर में स्थित पुराने शिवलिंग को संरक्षित करने के लिए उस पर तांबे का क लश चढ़ाया गया है। यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित है। मंदिर के पास संस्कृत महाविद्यालय है। जिसकी स्थापना 1820-21 में हुई थी। यहां संस्कृत शिक्षा दी जाती है। 

आज है विश्व नगर दिवस

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
सरधना तहसील में काली व हिंडन नदियों के मध्य स्थित है। ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च के अलावा बेगम समरु का इतिहास देखने लायक है। बेगम समरु के पुराने महल में सेमिनरी बनी है। यहां महाभारत कालीन मंदिर भी है। पांडवों ने इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी। हस्तिनापुर से लाक्षा गृह जाते समय इसी स्थान पर उन्हें स्वप्न में शिवजी ने मंदिर की स्थापना का संदेश दिया था। तब पांडवों ने इसे स्थापित किया था। आज भी प्रमुख त्यौहार यहां मनाए जाते हैं। ठहरने के लिए धर्मशाला की व्यवस्था है। चर्च में माता मरियम की चमत्कारी तस्वीर है।  
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इतिहास में दर्ज है मेरठ का नाम

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रोशनी से जगमगाता पुरा महादेव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
वरिष्ठ इतिहासविद डॉ. केडी शर्मा के अनुसार इतिहास की पुस्तकों में मेरठ का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, जंग ए आजादी की बात हो या धर्म की मेरठ दोनों क्षेत्रों में मशहूर है। यहां के पर्यटन स्थल काफी दर्शनीय हैं।

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