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एक साथ उठीं छह अर्थियां: श्मशान घाट में जगह पड़ गई कम, टीनशेड के नीचे सामूहिक अंतिम संस्कार, रो पड़ा पूरा गांव

Wed, 12 Jul 2023 09:22 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

एक घर से उठीं छह अर्थियां: श्मशान घाट में जगह पड़ गई कम, रुदन देख कांप उठा कलेजा, हर तरफ मातम और जले चूल्हे
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विलाप करते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
मेरठ जनपद में गंगानगर क्षेत्र के धनपुर गांव में मातम पसरा हुआ है। हर किसी के मन में सिर्फ एक ही सवाल है कि अगर परिवार कल घर से कहीं नहीं जाता तो शायद उनकी जान बच जाती है। लेकिन कहते हैं कि जो लिखा है उसे कोई मिटा नहीं सकता है। बस ऐसा ही इस परिवार के साथ हुआ है। बताया गया कि जब एक साथ घर से छह अर्थियां उठीं तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। वहीं, अंतिम संस्कार के अर्थियां श्मशान घाट पहुंची तो वहां जगह भी कम पड़ गई। 

बता दें कि धनपुर गांव के लिए मंगलवार की रात बेहद मनहूस थी। इतनी कि आज तक कभी किसी परिवार पर ऐसा कहर नहीं टूटा। परिवार के छह लोगों की अर्थियां एक साथ उठीं तो हर किसी का कलेजा कांप उठा। महिलाएं बेहोश हो गईं। रुदन मच गया।
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गांव में मचा कोहराम। - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद छह अर्थियों को गांव के श्मशान घाट में ले जाया गया। वहां जगह तक कम पड़ गई। अलग से टीनशेड लगाना पड़ा। एक साथ सामूहिक चिताएं बनाकर तीनों बच्चों, दोनों महिलाओं और नरेंद्र के शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस खौफनाक मंजर को देखकर हर किसी का कलेजा कांप उठा। लोग बस यही कह रहे थे कि ऐसा दिन किसी को न दिखाए।
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गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार। - फोटो : अमर उजाला
धनपुर गांव में सोमवार सुबह हादसे की सूचना मिलने के बाद जयपाल यादव के घर में सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रहीं थीं। चीत्कार मचा था। परिवार के छह लोगों की मौत के बाद कोई समझ नहीं पा रहा कि पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाएं तो कैसे? जयपाल के आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे थे। 

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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
वे कभी बेटे नरेंद्र का नाम लेते तो कभी बहू अनिता और बबीता का नाम लेकर रोने लगते। तीनों बच्चे दीपांशु, हिमांशु और वंशिका का नाम लेते हुए कई बार बदहवास हो गए। परिचित-रिश्तेदार गमगीन हैं कि अचानक ये क्या हो गया। नरेंद्र का पूरा परिवार उजड़ गया। धर्मेंद्र की पत्नी और बेटी चली गई। रात को सवा नौ बजे शव गांव पहुंचे तो हाहाकार मच गया। 
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गांव में मचा कोहराम। - फोटो : अमर उजाला
शवों को तीन एंबुलेंस से लाया गया। इस खौफनाक मंजर को देखकर परिवार के लोग बदहवास हो गए। कुछ देर तक देहरी पर रखने के बाद छह अर्थियां एक साथ उठीं तो पूरा गांव उमड़ पड़ा। हर किसी की आंख से आंसू बहने लगे। गांव के श्मशान घाट में एक साथ सामूहिक छह चिताएं बनाई गईं।
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गांव में मातम पसरा है। - फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि जितेंद्र के 17 वर्षीय बेटे प्रियांक ने सभी छह शवों को मुखाग्नि दी। पिता जयपाल की हालत बिगड़ने के बाद उनको श्मशान में नहीं ले जाया गया।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
आठ साल के कार्तिक की हालत बेहद गंभीर
धर्मेंद्र के हाथ और पैर में फ्रैक्चर है। उनको परिवार के लोग घर ले आए। आठ साल के कार्तिक के सर में 22 टांके हैं, उसकी हालत बेहद गंभीर है। वह गौतमबुद्धनगर के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती है।

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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
एक सप्ताह पहले दोस्तों के साथ गए थे नरेंद्र
नरेंद्र और परिवार के लोग अक्सर खाटू श्याम के दर्शन करने के लिए जाते रहते थे। एक सप्ताह पहले नरेंद्र दोस्तों के साथ भी दर्शन करने गए थे। इस बार परिवार के साथ प्रोग्राम बनाया था।

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हाईवे पर भीषण हादसा। - फोटो : अमर उजाला
विद्यापीठ ग्लोबल स्कूल में पढ़ते थे तीनों बच्चे
दीपांशु, हिमांशु और वंशिका तीनों मवाना के विद्यापीठ ग्लोबल स्कूल में पढ़ते थे। दीपांशु ने इसी साल 88 फीसदी नंबरों के साथ 10वीं पास की थी। वह पढ़ने में बेहद होनहार था। हादसे में बच्चों के मरने की खबर जिसने भी सुनी वो सदमे में आ गया। गांव में हर कोई बच्चों के बारे में कहता रहा कि तीनों पढ़ने में बहुत तेज थे।
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाजियाबाद में हादसा - फोटो : अमर उजाला
दीपांशु के जाने का नहीं था मन
दीपांशु का खाटू श्याम के दर्शन को जाने का मन नहीं था। दोस्त राजन ने बताया कि दीपांशु पहले मना कर रहा था, अचानक सुबह चला गया। दीपांशु सेना में अधिकारी बनना चाहता था, इसके लिए उसने एनडीए की कोचिंग भी शुरू कर दी थी। गांव के लोग कह रहे थे कि वो नहीं जाता तो बच जाता।
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