पांव में छाले और जुबां पर भोले के जयकारों के संग कांवड़िये मंजिल की ओर बढ़ते जा रहे हैं। कुछ मन्नत पूरी होने पर कांवड़ ला रहे हैं और तो कुछ ने कांवड़ के साथ ही मन्नत भी मांगी है। हाईवे पर कांवड़ियों की संख्या और दिनों के मुकाबले मंगलवार को चार गुना अधिक रही। बारिश के बाद मौसम अनुकूल होने के चलते शिवभक्तों ने दिन में भी यात्रा की। मोदीपुरम, कंकरखेड़ा, रुड़की रोड और दिल्ली रोड पर 150 से अधिक सेवा शिविर लगाए गए हैं।
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kanwar yatra 2023
- फोटो : Amar Ujala
प्रेमिका से शादी हुए तो लाए कांवड़
दिल्ली निवासी राहुल ने बताया कि वह कई साल से सारिका से प्रेम करते थे। परिवार तैयार नहीं था, इसलिए शादी नहीं हुई। 23 साल से लगातार कांवड़ ला रहा हूं। बीते वर्ष परिजन मान गए और विवाह हो गया। मन्नत मांगी थी कि विवाह होने पर दोनों साथ में कांवड़ लाएंगे। भगवान शिव ने मुराद पूरी कर दी इसलिए साथ में कांवड़ लाए हैं। आगे भी परिवार की सुख समृद्धि के लिए कांवड़ लाएंगे।
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स्कूली छात्र लाए पहली बार कांवड़
रोहिणी निवासी 18 वर्षीय सचिन, 18 वर्षीय कृष्ण सिंह, 20 वर्षीय रोहित और सुलतानपुरी निवासी 17 वर्षीय दिपांशु चारों दोस्त पहली बार कांवड़ लाए। सभी युवकों के दसवीं कक्षा में अच्छे नंबरों से पास हुए। मन्नत मांगी थी कि अच्छे नंबर से उत्तीर्ण होने पर कांवड़ लाएंगे। चारों दोस्तों ने 7 जुलाई को जल उठाया और 11 को मेरठ पहुंच गए।
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बीएससी की छात्रा लाई छठी कांवड़
गाजियाबाद निवासी वैष्णवी ने बताया कि वह 6 साल से कांवड़ ला रही हैं। वह बीएससी द्वितीय वर्ष में हैं। कांवड़ लाने से खुशी मिलती है। परिवार की समृद्धि के लिए कांवड़ लाते हैं। साथ में कांवड़ ला रहे मनीष ने बताया कि दसवीं बार कांवड़ ला रहे हैं।
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प्रयांक अभिषेक लगाए पहली बार कांवड़
दिल्ली निवासी नौ वर्षीय प्रयांक और आठ वर्षीय अभिषेक पहली बार अपने पिता तिलकधर के साथ कांवड़ लाएं। बड़ा चौथी और छोटा तीसरी कक्षा में पढ़ता है। दोनों बच्चों के लिए पिता ने अपने हाथ से ही कांवड़ बनाई। यात्रा मार्ग पर दोनों बच्चों का सभी ने स्वागत किया। चौथी कक्षा का छात्र विनय भी अपने पिता बबलू के साथ कांवड़ लाया।
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60 साल की चंचल ने उठाई 22 किलो की कांवड़
दिल्ली निवासी चंचल शर्मा मंगलवार को मेरठ पहुंचीं। चंचल ने बताया कि उनकी उम्र 60 वर्ष है, और बचपन से ही कांवड़ ला रही हैं। परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इस बार कांवड़ उठाई है। कांवड़ यात्रा में आकर खुशी मिलती है। इस बार 22 किलो की कांवड़ उठाई है।
लाइटों से जगमगाई आदियोगी कांवड़
यात्रा में अलग-अलग कांवड़ के बीच 40 फीट की आदियोगी कांवड़ सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही। भगवान शिव के मस्तक पर जगमगाता चंद्रमा सभी को मोहित कर रहा था। झांकी में सबसे आगे नंदी जी विराजमान दिखे। बेगमबाग रोहिणी की से आए कलाकारों ने मोदीपुरम कंकरखेड़ा के बीच शिव पार्वती नृत्य भी प्रस्तुत किया। झांकी में हनुमान जी का बाहुबली स्वरूप सभी को मंत्रमुग्ध कर रहा था। इसके साथ ही प्रीतमपुरा परवाना से जय श्री महाकाल सेवा समिति विशाल कांवड़ लेकर आई। तेरह युवकों की टीम कांवड़ लाई। झांकी में शिव जी पीछे बिच्छुओं का सिंहासन बनाया गया।