छात्रा का फाइल फोटो और जांच करती पुलिस।
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बोले विशेषज्ञ
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा बताते हैं कि आत्महत्या कोई अचानक नहीं करता। इससे पहले वह जिन चीजों से गुजरता है उसे संकेत माना जा सकता है। बात-बात पर गुस्सा करना, हमेशा उदास रहना, नींद न आना, मानसिक उतार चढ़ाव आदि। गंभीर तनाव और डिप्रेशन के बीच अचानक शांत हो जाना। ऐसे लोग अकेले रहना पसंद करते हैं। आत्महत्या को रोकने का सबसे अच्छा तरीका संकेतों, डिप्रेशन और डिसऑर्डर के लक्षणों को पहचानना है। समय रहते उस व्यक्ति को समझकर आत्महत्या से रोका जा सकता है।
मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर का कहना है कि पहले लोग सहनशील थे, लेकिन अब लोगों की सहनशीलता कम हो रही है, यही वजह है कि वे जान दे रहे हैं। डिप्रेशन की समस्या बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में तेजी से फैल रहा है। अगर मन में लगातार नकारात्मक और खोद को चोट पहुंचाने वाले ख्याल आएं तो मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।