कोरोना की वजह से दो वर्ष के ब्रेक के बाद रविवार को मेरठ में हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक ऐतिहासिक नौचंदी मेले का रंगारंग आगाज हो गया। इस मौके पर नवचंडी मंदिर में पूजा-अर्चना और बाले मियां की मजार पर चादरपोशी की गई। शांति के प्रतीक कबूतर और रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ाए गए। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ लिया।
मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह, आईजी प्रवीण कुमार और जिलाधिकारी के. बालाजी ने फीता काटकर मेले का शुभारंभ किया। तीनों अधिकारियों ने नौचंदी मैदान में स्थापित बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर, भारत माता, महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और किसान-जवान की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह ने कहा कि नौचंदी मेले को दो साल पहले शासन ने प्रांतीय मेला घोषित किया था।
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कबूतर उड़ाकर किया गया मेले का उद्घाटन
- फोटो : amar ujala
कोविड-19 के चलते 2020 और 2021 मे मेले का आयोजन नहीं हो सका था। इस बार भव्य आयोजन होगा। जिलाधिकारी के. बालाजी ने कहा कि मेला लगाने की जिम्मेदारी जिला पंचायत को दी गई है। सिटी मजिस्ट्रेट को मेले का नोडल अधिकारी बनाया गया है। मेला समिति की मदद से मेले का सफल आयोजन कराया जाएगा। इस मौके पर एसएसपी प्रभाकर चौधरी, सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार भट्ट मौजूद रहे।
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नौचंदी मेले का हवन के साथ उद्घाटन करते अधिकारी
- फोटो : amar ujala
आजादी की जंग का गवाह है मेला
अंग्रेजों के अत्याचार और देशभक्तों की बगावत के सुरों को भी नौचंदी मेले ने खूब सुना। इस मेले को 1857 का संग्राम देखने का भी गौरव प्राप्त है।
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चादर चढ़ाते श्रद्धालु
- फोटो : amar ujala
नौचंदी मेले के लिए 21 सदस्यीय समिति गठित
नौचंदी मेले मेले के संचालन के लिए 21 सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। इसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, अपर नगर आयुक्त, जिला विद्यालय निरीक्षक, सहायक निदेशक विद्युत, उप नियंत्रक नागरिक सुरक्षा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, एसपी सिटी, जिला सूचना अधिकारी, सीओ सिविल लाइंस, सीओ ट्रैफिक, अपर नगर मजिस्ट्रेट, अधिशासी अभियंता, वरिष्ठ कवि हरिओम पंवार, राष्ट्रपति पदक से अलंकृत सरबजीत कपूर, रेव्ह डेनियल मसीह, नायब शहरकाजी जैनुर राशिदीन, अरिहंत प्रकाशन योगेश जैन, समाजसेवी सलीम, संजय कुमार जैन को शामिल किया गया है। एक महीने तक चलने वाले मेले में यही समिति फैसले लेगी।
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नौचंदी मेले में नृत्य करते कलाकार
- फोटो : amar ujala
होली के बाद होता है मेले का उद्घाटन
परंपरा के अनुसार नौचंदी मेले का आगाज होली के बाद आने वाले दूसरे रविवार को होता है। यह मेला हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। नवचंडी माता और हजरत बाले मियां की मजार आमाने-सामने बनी है। मंदिर में रोजाना जहां भजन और कीर्तन होता है वहीं मजार पर कव्वाली होती है। मेले के दौरान मंदिर के घंटों के साथ ही अजान की आवाज एक सांप्रदायिक अध्यात्म की प्रतिध्वनि देती है। यह मेला करीब एक महीना चलता है।
बुलंदशहर नुमाइश खत्म होने पर सजेगा मेला
अभी करीब एक पखवाड़े तक बुलंदशहर में नुमाइश चलनी है। इसके बाद ही दुकानदार वहां से नौंचंदी मेेले में आएंगे। मेला आयोजन के लिए 30 लाख रुपये का बजट आ चुका है। शेष धन भी जल्द मिलने की संभावना है।