समिति के सदस्य महेंद्र सिंह कहते हैं, पंचायत में सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का फैसला लिया गया था। उनमें कन्या भ्रूण हत्या, दहेज जैसी बुराई के प्रति सामाजिक जागरूकता लाना भी था। लड़कियों को टाइट कपड़े पहनने से भी मना किया गया। लड़कों को भी सड़कों पर जांघिया पहनकर न दौड़ने, नशे से दूर रहने को कहा गया था। पंचायत में बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर समझाया गया था। जिन कपड़ों से अंग प्रदर्शन होता हो, उन्हें नहीं पहनना चाहिए। मोबाइल का भी दुरुपयोग हो रहा है।