जिन बदमाशों ने बाफर गांव में विकेंद्र की हत्या की उन्होंने पहले उससे दोस्ती की और उसे भरोसे में ले लिया। मंगलवार को भी विकेंद्र के साथ दोनों बदमाशों ने चाय पी। गेट तक विकेंद्र छोड़ने आया। बदमाशों ने कहा कि ठीक है विकेंद्र, अच्छा चलते हैं। इसके बाद पिस्टल से उसके सीने में ताबड़तोड़ चार गोलियां बरसा दी। पुलिस ने उनका पता लगाने के लिए विकेंद्र के मोबाइल की सीडीआर निकाली है। जिसमें कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
बाफर गांव में विकेंद्र व जितेंद्र के बीच अदावत चल रही थी। तीन साल पहले गांव में कार्यक्रम चल रहा था। जिसमें विकेंद्र और जितेंद्र की शर्त लगी थी, जितेंद्र जीत गया था। पुलिस के मुताबिक इसके चलते विकेंद्र ने उसकी हत्या कर दी। जितेंद्र की हत्या में विकेंद्र और उसके तीनों भाई कविन्द्र, छंगा उर्फ नरेंद्र व लोकेंद्र उर्फ भूरा जेल गए थे। डेढ़ साल पहले विकेंद्र जेल से जमानत पर छूटकर आ गया था। जितेंद्र के बेटे विशाल और सागर अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहते थे, लेकिन विकेंद्र शातिर था। इसकी जानकारी जितेंद्र के बेटों को थी।