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ये है नकली पेट्रोल-डीजल का असली सच, जलेबी के रंग से तैयार करते थे तेल, तस्वीरों में देखिए

Fri, 23 Aug 2019 04:45 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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नकली पेट्रोल-डीजल का मामला - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में तेल माफिया जलेबी के रंग से नकली पेट्रोल और डीजल तैयार करते थे। फैक्टरी के अंदर जमीन में बड़े बड़े लोहे के टैंक दबे थे। जिसमें थिनर, सॉलवेंट और बैंजीन का मिश्रण होता था। उसके बाद जलेबी वाले रंग को इसमें मिलाया जाता था। मिश्रण का रंग पेट्रोल-डीजल जैसा हो जाता था। जिसके बाद इसको टैंकरों में नोजिल के जरिये भरा जाता था।
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फैक्टरी में जांच करने पहुंची थी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के मुताबिक तेल माफिया राजीव जैन और प्रदीप गुप्ता से नकली पेट्रोल-डीजल बनाने का तरीका पूछा। दोनों तेल माफिया ने बताया कि उनके पास थिनर और सॉलवेंट का लाइसेंस है। करीब दस साल से थिनर और सॉलवेंट में रंग मिलाकर वह नकली तेल बनाते हैं। इसकी किसी को भनक न लग जाए, इसको लेकर आबादी से दूर फैक्टरी बनाई।

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नकली पेट्रोल-डीजल मामला - फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि फैक्टरी में पांच-छह कर्मचारी ही सारा काम करते थे, क्योंकि अधिकांश काम मशीनों के जरिये ही होता था। जिसका दोनों तेल माफिया ने डेमो भी करके दिखाया। जमीन में दबे टैंक में थिनर, सॉलवेंट व बैंजीन नोजिल पंपों के जरिये डाला जाता था, जिसमें जलेबी का रंग मिलाया जाता था। रंग मिलते ही नकली पेट्रोल-डीजल तैयार हो जाता था। एक टैंकर तेल में करीब 30 से 40 फीसदी नकली पेट्रोल-डीजल को मिलाया जाता था। उसके बाद ही वह टैंकर पेट्रोल पंप पर जाता था।

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नकली पेट्रोल-डीजल का मामला - फोटो : अमर उजाला
एक साथ तैयार होता 11 हजार लीटर तेल 
पूछताछ में तेल माफिया राजीव जैन और प्रदीप गुप्ता ने बताया कि एक साथ करीब 11 हजार लीटर नकली तेल तैयार हो जाता है। क्योंकि थिनर और सॉलवेंट टैंकरों से आता है। एक टैंकर में करीब 11 हजार लीटर तेल आता है। उसको देखते हुए एक साथ इतनी भारी मात्रा में नकली तेल तैयार होता है। करीब चार-पांच टैंकर रोजाना एक फैक्टरी में तैयार होता है।

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नकली पेट्रोल-डीजल - फोटो : अमर उजाला
फैक्टरी में सुबह से लगती लाइन 
इंडियन आयल कॉरपोरेशन द्वारा पेट्रोल-डीजल से भरे टैंकर सुबह से तेल माफियाओं की फैक्टरी में आने शुरू होते हैं। असली पेट्रोल और डीजल को ड्रमों में भरा जाता है। 30-40 फीसदी पेट्रोल निकालने के बाद नकली तेल टैंकर में नोजिल पंप से भरा जाता है। उसके बाद पेट्रोल पंपों पर यह टैंकर पहुंचते है। प्रारंभिक जांच में नकली तेल पकड़ में आसानी से नहीं आता।

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पुलिस ने छापेमारी कर 10 पकड़े थे - फोटो : अमर उजाला
पंजाब और हरियाणा से आते केमिकल 
पुलिस ने बताया कि तेल माफियाओं का नेटवर्क यूपी के अलावा दूसरे राज्यों में है। पूछताछ में बताया है कि केमिकल बैंजीन को वह पंजाब स्थित बहादुरगढ़ सौपला पीडी इंडस्ट्रीज और सेचुरे हिड हाईड्रोकार्बन आमुबेल कंपनी बरनाला पंजाब से खरीदते है। जहां पर टैंकरों में भरकर पेट्रोल पंप मालिक राजीव जैन व प्रदीप गुप्ता की फैक्टरी में आता था। उसके बाद नकली पेट्रोल-डीजल बनाया जाता था।

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