नकली पेट्रोल-डीजल मामला
- फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि फैक्टरी में पांच-छह कर्मचारी ही सारा काम करते थे, क्योंकि अधिकांश काम मशीनों के जरिये ही होता था। जिसका दोनों तेल माफिया ने डेमो भी करके दिखाया। जमीन में दबे टैंक में थिनर, सॉलवेंट व बैंजीन नोजिल पंपों के जरिये डाला जाता था, जिसमें जलेबी का रंग मिलाया जाता था। रंग मिलते ही नकली पेट्रोल-डीजल तैयार हो जाता था। एक टैंकर तेल में करीब 30 से 40 फीसदी नकली पेट्रोल-डीजल को मिलाया जाता था। उसके बाद ही वह टैंकर पेट्रोल पंप पर जाता था।