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तस्वीरें: कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने किया काली नदी के पुनर्जीवन का मंगल आगाज, पढ़िए ये खास बातें

Tue, 22 Jun 2021 10:18 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ में काली नदी के पुनर्जीवन का मंगल आगाज़ हुआ। - फोटो : amar ujala
मेरठ जिले से गुजरने वाली काली नदी के पुनर्जीवन का मंगल आगाज हो गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को रजपुरा ब्लाक के गांव गांवड़ी में पहुंचकर काली नदी को संवारने का कार्य किया। कमिश्नर, जिलाधिकारी, सीडीओ, डीएफओ ने नदी किनारे पौधे लगाए। वहीं मनरेगा से जुड़े 50 श्रमिकों, जेसीबी, पोकलेन मशीनों को कार्य में लगा दिया है। 

कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने कहा कि कार्य को मिशन मोड में करना होगा। ऐसा नहीं कि सिर्फ कार्यक्रम हुआ और अखबारों में प्रकाशित होने पर शांत हो गए। हमें 15 दिन में दो किलोमीटर में नदी को पवित्र बनाना है। कहा कि एक बड़े कार्यक्रम की तैयारी करें, जिससे यह कार्य पूरा कर लिया जाए। इसमें ग्राम प्रधानों और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग जरूरी है। एक सप्ताह में नदी की पैमाइश करने के निर्देश एसडीएम सदर संदीप भगिया को दिए गए हैं।

'कैच द रैन' अभियान के अंतर्गत नदी को संवारने के लिए प्लान तैयार किया गया है। दो दिन पहले ही मुख्य विकास अधिकारी शशांक चौधरी ने हस्तिनापुर और नंगली गांव का निरीक्षण किया था। गांवड़ी गांव के पास दो किलोमीटर के हिस्से में पोकलेन, जेसीबी मशीनों की सहायता से 100 फीट चौड़े स्थान की खुदाई की जाएगी। इस कार्य का शुभारंभ मंगलवार को कमिश्नर सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी के. बालाजी ने किया। इसमें मनरेगा से कार्य करने वाले श्रमिकों को भी रोजगार मिलेगा। इस अभियान को 15 दिन में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
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काली नदी के पुनर्जीवन का मंगल आगाज़ - फोटो : amar ujala
वहीं, अगले चरण में वन महोत्सव के दौरान पौधरोपण, वेटलेंड बनाने की योजना है। इस चरण को पूरा करने के बाद नंगली गांव से श्रमदान कार्य शुरू किया जाएगा। इस कार्य का नाम काली नदी सेवा दिया गया है।
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मौके पर अधिकारी। - फोटो : amar ujala
मेरठ जिले में काली नदी की लंबाई 40 किलोमीटर है। काली नदी मुजफ्फरनगर जिले के खतौली तहसील के अंतवाड़ा गांव से शुरू होकर मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, फरुर्खाबाद होते हुए कन्नौज में गंगा नदी में मिल जाती है। इसकी कुल लंबाई 600 किलोमीटर है। मेरठ में नदी सरधना तहसील के नंगली गांव से प्रवेश करते हुए खरखौदा ब्लाक के अतराड़ा गांव से होते हुए हापुड़ में प्रवेश करती है। नीर फाउंडेशन के संस्थापक रमन त्यागी ने बताया कि मेरठ शहर से पहले तक नदी प्रदूषित नहीं है। ये मेरठ शहर के बाद सबसे अधिक प्रदूषित है। इसमें शहर का पूरा सीवरेज डाला जा रहा है। 

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कार्यक्रम में बैठ अधिकारी। - फोटो : amar ujala
गांवड़ी गांव के नदी पुल से शुरुआत
इसकी खुदाई की शुरुआत मेरठ-किला परीक्षितगढ़ मार्ग पर गांवड़ी गांव के नदी के पुल से होगी। इसमें सिंचाई, वन, लघु, ब्लाक, राजस्व आदि अधिकारी शामिल रहेंगे। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं को भी श्रमदान के लिए प्रेरित किया गया है। इस कार्य में चार जेसीबी, 200 सफाई कर्मचारी, एक पोर्कलेन मशीन से 15 दिन कार्य किया जाएगा। 
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कार्यक्रम में बोलते कमिश्नर सुरेंद्र सिंह। - फोटो : amar ujala
अब पंचायत घर में शुरू हुआ रेन वाटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम
मुख्य विकास अधिकारी की निगरानी में लगातार प्राइमरी स्कूलों, पंचायत घरों में रेन वाटर हार्वेंस्टिंग लगाने की शुरुआत हो गई है। रजपुरा ब्लॉक के कस्तला गांव के प्राइमरी स्कूल में रेन वाटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम लगाने के शुभारंभ के बाद अब मवाना ब्लाक के पंचायत घर में शुरुआत की गई है। गांव नंगला कतार में बोरिंग कार्य शुरू कर दिया गया है।
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