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- फोटो : अमर उजाला
जिनको मैंने सिखाया, वो मेडल ला रहीं
बागपत के धनौरा गांव की ऋतिका वेदवान की कहानी भी ऐसी है। गांव से तीरंदाजी में निकली वह पहली लड़की थीं। उनका भाई आर्चरी करता है। उसी ने ऋतिका को अपने साथ एकेडमी ले जाना शुरू किया। यहीं से उनका सफर शुरू हुआ। 24 वर्षीय ऋतिका नोएडा के गुरुकुल स्टेडियम में तीरंदाजी की कोच हैं। उन्होंने सीनियर नेशनल में एक गोल्ड और दो सिल्वर मेडल जीते हैं। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में पांच साल चैंपियन रही हैं।
24 जनवरी 2019 को उन्हें लक्ष्मीबाई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। ऋतिका के पिता किसान हैं। गांव वाले उनके तीरंदाजी सीखने पर ताना मारते थे। बताती हैं, गांव से पहली खिलाड़ी मैं थी। मेरे बाद मधु और साक्षी वेदवान निकलीं। मधु इंटरनेशनल मेडलिस्ट हैं और साक्षी सीनियर नेशनल मेडलिस्ट। हमें देखने के बाद गांव की सोच बदली। अब लोग अपनी लड़कियों को पढ़ाते भी हैं और खिलाते भी। जिनको मैंने सिखाया, वो मेडल लेकर आईं। यह देखकर बहुत खुशी होती है।