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Golden Girl: चंदे से जूते खरीदे, गन्ने से प्रैक्टिस की, भाई के त्याग का अन्नू ने सोने से बढ़ाया मान

Tue, 03 Oct 2023 08:35 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ से सटे सरधना क्षेत्र के बहादरपुर गांव निवासी अन्नू रानी ने एशियन गेम्स में जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिया है।
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Annu Rani - फोटो : Amar Ujala
मेरठ से सटे सरधना क्षेत्र के बहादरपुर गांव निवासी अन्नू रानी ने चीन में चल रहे एशियन गेम्स में जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिया है। अन्नू रानी के मेडल जीतते ही गांव में खुशी का माहौल है। अन्नू रानी के महिलाओं की जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता में  सोना जीतने पर उत्सव जैसा नजारा है।

अन्नू का सबसे बेहतरीन प्रयास 62.92 मीटर का रहा। एशियन गेम्स में एथलीट अन्नू के भाले से देश को गोल्ड की उम्मीद थी, जिस पर वह खरी उतरी हैं।  अन्नू रानी का अपने खेत की चकरोड़ से एशियन गेम्स तक पहुंचने का सफर बेहद दिलचस्प रहा है।
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इस चकरोड पर अभ्यास करती थी अन्नू - फोटो : Amar Ujala Meerut
गन्ने को भाला बनाकर किया भाला फेंक का अभ्यास
जैवलिन क्वीन के नाम से पहचानी जाने वाली अन्नू के संघर्ष की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। गांव की पगडंडियों पर खेलते और गन्ने को भाला बनाकर प्रैक्टिस करने वाली अन्नू एक दिन देश-विदेश में होने वाली प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी, यह शायद ही किसी ने सोचा होगा, लेकिन अपने संघर्ष और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने ये कर दिखाया। मंगलवार को वह स्वर्ण जीतने के इरादे से मैदान पर उतरी थीं और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
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मेरठ की अन्नू रानी - फोटो : amar ujala
पिता ने रोका तो चोरी से किया अभ्यास
अन्नू रानी तीन बहन व दो भाइयों में सबसे छोटी हैं। उनके सबसे बड़े भाई उपेंद्र कुमार भी 5,000 मीटर के धावक थे और विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा भी ले चुके हैं। बड़े भाई के साथ अन्नू रानी ने भी खेल में रुचि दिखाई और सुबह चार बजे उठकर गांव में ही रास्तों पर दौड़ने जाया करतीं।

कई बार पिता ने अन्नू खेल में दिलचस्पी नहीं दिखाई तो अन्नू चोरी से अभ्यास करतीं। अन्नू यहां किसी ग्राउंड में नहीं, बल्कि कच्चे संकरे रास्ते जिसे ग्रामीण भाषा में चकरोड़ कहा जाता है, उस पर दौड़तीं। इसी चकरोड़ पर गन्ने को भाला बनाकर वह पहले जोर से फेंकती। उन्होंने यह प्रयास कई महीनों तक जारी रखे।

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अन्नू रानी भाई के बच्चों के साथ - फोटो : Amar Ujala Meerut
भाई ने किया त्यागा, तो अन्नू ने बढ़ाया मान
अन्नू की खेल में रुचि बढ़ी, तो भाई उपेंद्र कुमार ने उन्हें गुरुकुल प्रभात आश्रम का रास्ता दिखाया। घर से करीब 20 किलोमीटर दूर होने के कारण अन्नू जैवलिन थ्रो का अभ्यास करने के लिए सप्ताह में तीन दिन गुरुकुल प्रभात आश्रम के मैदान में जाती थीं। अन्नू के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि दो खिलाड़ियों पर होने वाले खर्चे को वहन कर सकें, इसे देखकर भाई उपेंद्र ने त्याग किया और बहन को आगे बढ़ाने में जुट गए।
 
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अन्नू रानी - फोटो : अमर उजाला
कभी चंदे की रकम से खरीदे थे जूते
उपेंद्र बताते हैं कि अन्नू के पास जूते नहीं थे, चंदे से इकट्ठा की गई रकम से उसके लिए जूते खरीदे। अन्नू ने अपना अभ्यास जारी रखा और जेवलिन थ्रो में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अपने ही रिकॉर्ड तोड़कर वह नेशनल चैंपियन बन गईं। इसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मंगलवार को सुबह से ही देश के साथ-साथ मेरठवासियों भी उनकी जीत की कामना कर रहे थे। 

 
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Annu Rani Family - फोटो : Amar Ujala
अन्नू की उपलब्धियां:
2021 - टोक्यो ओलंपिक में प्रतिभाग। 
2019 -  वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला का रिकॉर्ड। 
2019 - एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक।
2017 - एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक। 
2016 - साउथ एशियन गेम्स में रजत पदक। 
2014 - एशियन गेम्स में कांस्य पदक 

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