विकास दुबे और उसके गैंग के जिन असलहों की खरीद फरोख्त की गई है, उसमें बसपा नेता सत्यवीर सिंह यादव की मुख्य भूमिका रही है। असलहे उसके रिश्तेदारों और गुर्गों ने ही लिए हैं। इटावा-भिंड रोड पर स्थित उसके रेस्टोरेंट दावत के पीछे ही असलहों की टेस्टिंग की गई थी। सेमी आटोमेटिक राइफल व अन्य असलहों से फायर किए गए थे।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
दीवार पर निशान भी मौजूद हैं। इन्हीं सभी वजहों के चलते एसटीएफ ने सत्यवीर को भी आरोपी बनाया है। हालांकि बेची गई दीपक दुबे की सेमी आटोमेटिक राइफल अभी नहीं बरामद हो सकी है। झींझक निवासी संजय परिहार के जरिये दहशतगर्द के मददगारों ने असलहों की सौदेबाजी की।
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विकास दुबे का एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ के मुताबिक संजय ने इस संबंध में भिंड देहात (मध्य प्रदेश) निवासी सत्यवीर सिंह से मुलाकात की। सत्यवीर देहात भिंड विधानसभा सीट से तीन बार विधायक का चुनाव लड़ चुका है। इसी की मदद से तीन लाख रुपये में दीपक दुबे की सेमी आटोमेटिक राइफल व अन्य असलहे बेचे गए।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
उसने सीधे कोई असलहा खुद न खरीदकर अपने परिचितों को दिलाएं। अब दोबारा असलहों की डील हो रही थी। इस बार दाम कम करने की बात हो रही थी। इसी सिलसिले में सत्यवीर का रिश्तेदार मनीष यादव कानपुर आया।
पनकी में शिव तिवारी की सेमी आटोमेटिक राइफल का एक लाख 70 हजार और डबल बैरल बंदूक का सौदा 30 हजार रुपये में हुआ। तभी एसटीएफ ने सभी को दबोच लिया। यही दो लाख की रकम एसटीएफ ने बरामद की है।