उन्नाव कांड की पीड़ित अस्पताल में भर्ती किशाेरी को होश आने के तीन बाद बुआ और बहन की मौत का सच परिजनों ने बताया तो वो बिलख कर रो पड़ी। बोली हम तीनों कुरकुरे के पैकेट लेकर खेत गए थे। चारा काटने के बाद वहीं बैठे थे। तभी लंबू (हत्यारोपी विनय) व सचिन भी कुरकुरे लेकर आए। हम सभी कुरकुरे खाने लगे। तीखा लगा तो विनय ने पानी की बोतल दे दी। बुआ और चचेरी बहन मुझसे बोतल छीनकर पानी पी गईं। आखिर में थोड़ा पानी बचा तो मैंने पी लिया। इसके बाद हम तीनों छटपटाने लगे तो लंबू व सचिन वहां से भाग निकले...।
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बुआ भतीजी को अपने ही खेत में किया गया था दफन
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पीड़िता की हिम्मत को सलाम है। जब उससे पूछा गया कि क्या विनय व सचिन ने उसके साथ किसी तरह की जबरदस्ती को उसने बहुत तेजी से जवाब दिया। उसने कहा कि अगर वह ऐसा करते तो उनको वहीं पीट देती। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितनी हिम्मती है। जहर पिलाकर उसे धोखा दिया गया।
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उन्नाव केस: पुलिस की कैद में आरोपी
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एक साथ तीनों किशोरियों की तबीयत बिगड़ी थी। लिहाजा रीजेंसी में भर्ती किशोरी को नहीं पता था कि उसकी बुआ व चचेरी बहन की मौत हो चुकी है। होश में आने के तीन दिन बाद इस बारे में उसको जानकारी मिली तो सहम गई। आंखों से आंसू गिरने लगे। उसको यकीन नहीं हो पा रहा है कि वह दोनों अब दुनिया में नही रहीं ।
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उन्नाव: बुआ-भतीजी की हत्या का मामला
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पीड़िता ने बयानों में बताया कि वारदात की शाम विनय और सचिन जब उसके पास आए थे तो बहुत ही शांत थे। अंदाजा नहीं लगा था कि वह पानी की बोतल में जहर घोलकर लाए हैं। किशोरी के मुताबिक पानी पीने के कुछ मिनट बाद अचानक पूरे शरीर में कुछ होने लगा। ऐसा लगा कि दम घुट जाएगा। मुंह से झाग गिरने लगा। इसी दौरान दोनों वहां से भाग निकले।
उन्नाव कांड की पीड़िता और प्रत्यक्षदर्शी किशोरी ने उस शाम की दास्तां मजिस्ट्रेट के सामने बयां की। मजिस्ट्रेटी बयान में पीड़िता ने वारदात की एक-एक बात बताई। सूत्रों के मुताबिक जेल भेजे गए आरोपियों ने जो तथ्य बताए थे, पीड़िता ने उसकी पुष्टि की है। उसने बताया कि विनय उससे जबरन दोस्ती करना चाहता था। उसने इनकार कर दिया तो वह दबाव बनाने का प्रयास करने लगा। फिर भी कामयाब न होने पर उसने वारदात को अंजाम दिया। यही बात आरोपियों ने भी पुलिस की पूछताछ में बताई थी।