पीयूष जैन के यहां इत्र और कंपाउंड से जुड़ा 45 तरह का कच्चा माल मिला है। इसकी सूची तैयार करने में ही अफसरों को पसीना छूट गया। स्टॉक इतना है कि अभी तक पूरी तरह से आंकलन नहीं हो पाया है। इत्र का सुगंध के साथ ही पान मसाला, सौंदर्य प्रसाधन, मेडिकल, मिठाई और खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
जांच अफसरों ने बताया कि कारोबारी के परिसरों से अलग-अलग जगहों पर तमाम तरह का कच्चा माल मिला है। तैयार माल की कीमत एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक होती है। बड़े-बड़े ब्रांड अपना लेबल लगाकर इन्हें मनचाहे दाम पर बेचते हैं। इनमें इस्तेमाल में होने वाले उत्पादों का जीएसटी भी अलग-अलग है। इसी के चलते स्टॉक की गणना में समय लग रहा है।
फर्जी बिलिंग के जरिये पीयूष से खरीदा माल
पान मसाला कारोबार में सबसे ज्यादा टैक्स चोरी होती है। इसी कारोबार में सबसे ज्यादा कैश फ्लो भी होता है। हर दिन करोड़ों के माल की बिक्री होती है। सूत्रों के अनुसार, पान मसाला, ट्रांसपोर्टर और इत्र कारोबारियों के बीच सांठगांठ के चलते मामला खुल नहीं पाता।