फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शीला दीक्षित ने कन्नौज से की थी राजनीति पारी की शुरुआत, सत्ता में आने के बाद बदली दी थी तस्वीर

Sun, 21 Jul 2019 04:41 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा आशुतोष दीक्षित, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 5
कन्नाैज में एक कार्यक्रम के दौरान शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
आधुनिक कन्नौज की जन्मदाता यानी शीला दीक्षित का इस जिले से गहरा नाता रहा। इसी जिले की जनता ने उन्हें पहली बार संसद भेजा। सत्ता हाथ में आई तो कन्नौज की तस्वीर बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक के बाद एक सौगातों की देन थी कि कन्नौज न सिर्फ आसपास के जिलों से जुड़ा बल्कि एफएफडीसी के जरिए उसने विदेशी जमीन पर भी अपनी धाक जमाई।
 
विज्ञापन

2 of 5
शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
शीला दीक्षित ने अपनी सियासी पारी की शुरुआत कन्नौज से 1984 से की थी। जीत के बाद राजीव गांधी की सरकार में केंद्रीय संसदीय कार्य राज्यमंत्री का दर्जा मिला। उन्होंने विकास कार्यों के जरिए कन्नौज की तस्वीर बदलने का काम किया। हरदोई को जिले से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर पुल का निर्माण कराया।
विज्ञापन

3 of 5
शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
इस पुल का उद्घाटन खुद राजीव गांधी ने किया था। इसके अलावा तिर्वा में दूरदर्शन रिले सेंटर स्थापित कराकर लोगों को मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए। टेलीफोन एक्सचेंज को मैनुअल से आटोमेटिक शीला दीक्षित के समय किया गया। लाख बहोसी पक्षी विहार भी शीला दीक्षित के सांसद रहते बना।

4 of 5
एक कार्यक्रम के दौरान शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
पति विनोद दीक्षित की याद में शहर के मकरंदनगर में उनके नाम पर अस्पताल का निर्माण कराया गया। इसे शहर की सीएचसी का दर्जा मिला हुआ है। यहीं सीएमओ कार्यालय भी है। हसेरन में सीएचसी का निर्माण कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
शीला दीक्षित का निधन (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
कन्नौज जिले की ख्याति विदेश तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा करने वाले  सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) का निर्माण भी शीला दीक्षित के कार्यकाल में हुआ। एफएफडीसी में देश के विभिन्न प्रदेशों के साथ ही विदेशों से भी छात्र-छात्राएं इत्र और सुगंधित तेल बनाने की कला सीखने आते हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें