मुफलिसी में जीवन बिताकर बेटी को अफसर बनाने का एक पिता का सपना गुरुवार को उसकी मौत के साथ टूट गया। मन्नतों के बाद जन्मी बेटी का शव देख पिता को इतना गहरा सदमा लगा कि हालत बिगड़ने से वह उसकी अर्थी को कंधा भी न दे सका। बेटी के गम में मां भी बेहोश हो गई। शुक्रवार को दोनों का एक क्लीनिक में इलाज कराया गया। अन्य परिजनों ने परियर घाट में उसका अंतिम संस्कार किया। फीस के लिए प्रधानाचार्य की फटकार से आहत होकर जान देने वाली 15 वर्षीय छात्रा स्मृति अवस्थी की मौत पर हर कोई स्तब्ध है। स्मृति अपने पिता की इकलौती संतान थी। शादी के कई साल बाद तक सुशील को संतान सुख नहीं मिला। पत्नी रेनू के साथ वह धार्मिक स्थलों पर माथा टेकता और मन्नतें करता रहा। बेटी स्मृति का जन्म हुआ तो उसे बेटे के तरह ही अच्छी परवरिश करने के लिए पिता जीतोड़ मेहनत करने लगा।