फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Profitable Agriculture Business: 21 साल के शिवम आलू से हर साल कमा रहे एक करोड़, चिप्स का प्लांट लगाने की तैयारी

Sat, 14 May 2022 01:11 PM IST
हिमांशु अवस्थी दिव्यांश सिंह, अमर उजाला, कानपुर

सार

आज कृषि का क्षेत्र सीमित नहीं रह गया है। अगर आपमें काम करने की लगन और पैसा कमाने की इच्छा है, तो आप कृषि से ढेर सारा पैसा कमा सकते हैं। ऐसा ही करके दिखा रहे हैं, इटावा जिले के 21 वर्षीय शिवम कुमार तिवारी। उन्होंने टिश्यू कल्चर लैब लगाई है और 200 एकड़ में बीज उत्पादन कर रहे हैं।
विज्ञापन
1 of 5
किसान शिवम तिवारी को पुरस्कृत करते कृषि शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही और सीएसए के कुलपति प्रो. डीआर सिंह - फोटो : अमर उजाला
बीटेक करने के बाद इटावा के नावली गांव के 21 वर्षीय शिवम कुमार तिवारी आलू के उन्नत किस्म के बीजों का उत्पादन कर रहे हैं। सीएसए के इटावा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग से 2019 में बीटेक करने वाले शिवम खेती से एक करोड़ रुपये सालाना मुनाफा कमा रहे हैं। 2017 में 30 एकड़ से इस एग्री स्टार्टअप की शुरुआत करने वाले शिवम की अब 200 एकड़ में बीजों का उत्पादन कर रहे हैं। वह टिश्यू कल्चर लैब में 17 तरह की आलू की प्रजातियों के उन्नत किस्म के बीज तैयार करके किसानों को बेच रहे हैं।

शुक्रवार को सीएसए में कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने शिवम को सम्मानित किया है। शिवम ने बताया कि 2017 में बीटेक की पढ़ाई के दौरान सेंट्रल पोटैटो रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) मेरठ में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। वहां आलू के बीजों के उत्पादन इकाई को देखा तो खेती करने की सोची। 
विज्ञापन

2 of 5
टिश्यू कल्ख्र लैब में काम करते शिवम - फोटो : अमर उजाला
प्रशिक्षण के बाद इटावा लौटकर किसान पिता राम करन तिवारी से बीज उत्पादन पर बात की। फिर 50 लाख का लोन लेकर टिश्यू कल्चर लैब बनाई। उन्होंने कहा कि इस काम में हर साल 40 लाख रुपये खर्च होते हैं और कुल आय 1.40 करोड़ की होती है। 
विज्ञापन

3 of 5
लैब में तैयार होते हैं पौधे - फोटो : अमर उजाला
चिप्स का प्लांट लगाने की तैयारी 
शिवम ने बताया कि अब इटावा में आलू के चिप्स का प्लांट लगाने की तैयारी है। इस प्लांट में किसानों से बाजार के मूल्य से ज्यादा दाम पर आलू खरीदकर उसके चिप्स बनाकर बाजार में उतारेंगे।

4 of 5
टिश्यू कल्चर लैब में तैयार होते पौधे - फोटो : अमर उजाला
टिश्यू कल्चर लैब से ये होते लाभ
टिश्यू कल्चर लैब से विकसित होने वाले पौधे या बीजों में रोग नहीं लगता। यहां के बीज या पौधे के विकसित होने की संभावना 95 प्रतिशत तक होती है। इस कारण किसान इनकी ज्यादा मांग करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
किसान शिवम तिवारी - फोटो : अमर उजाला
ऐसे बनता है आलू का बीज
शिवम ने बताया कि मार्च में सीपीआरआई मेरठ से पांच हजार रुपये कीमत के अलग-अलग प्रजाति के माइक्रो प्लांट लाते हैं। लैब में एक पौधे से पांच पौधे बनाते हैं। उसके बाद उन पांच पौधों को शीशी में लगाकर उनसे कई पौधे बनाए जाते हैं। एक माइक्रो प्लांट से 50 हजार पौधे बना सकते हैं। अक्तूबर में पौधों को ग्रीन नेट हाउस में और 10 दिन बाद व्हाइट ग्रीन हाउस में लगाया जाता है। फरवरी में पौधों से कंद (बीज) निकलने लगते हैं, जिसकी बिक्री होती है। फिलहाल कुफरी बहार, कुफरी संगम, सुखियारी और फ्राई होम समेत 17 प्रजातियों के बीजों का उत्पादन किया जा रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें