किसान शिवम तिवारी
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ऐसे बनता है आलू का बीज
शिवम ने बताया कि मार्च में सीपीआरआई मेरठ से पांच हजार रुपये कीमत के अलग-अलग प्रजाति के माइक्रो प्लांट लाते हैं। लैब में एक पौधे से पांच पौधे बनाते हैं। उसके बाद उन पांच पौधों को शीशी में लगाकर उनसे कई पौधे बनाए जाते हैं। एक माइक्रो प्लांट से 50 हजार पौधे बना सकते हैं। अक्तूबर में पौधों को ग्रीन नेट हाउस में और 10 दिन बाद व्हाइट ग्रीन हाउस में लगाया जाता है। फरवरी में पौधों से कंद (बीज) निकलने लगते हैं, जिसकी बिक्री होती है। फिलहाल कुफरी बहार, कुफरी संगम, सुखियारी और फ्राई होम समेत 17 प्रजातियों के बीजों का उत्पादन किया जा रहा है।