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मां बनने में 'प्रदूषण का ग्रहण', हारमोंस में उथल-पुथल, आपको चौंका देगी ये रिपोर्ट

Wed, 20 Feb 2019 05:13 PM IST
शिखा पांडेय रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
कानपुर में 20 साल की रश्मि की शादी हुए सिर्फ चार महीने हुए हैं। स्त्री रोग संबंधी कुछ दिक्कत हुई तो वह जच्चा-बच्चा अस्पताल पहुंचीं। कुछ असामान्य से लक्षण मिलने पर स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेेय ने हारमोंस की जांच कराई। रिपोर्ट देखकर डॉक्टर चौंक गईं। एलएचएफएसएच हारमोन बहुत अधिक बढ़ा मिला। इसका मतलब है कि उसका मासिक धर्म बंद हो गया और अंडाशय में अब अंडे नहीं बनेंगे। उसके मां बनने का समय खत्म हो चुका है। हारमोंस के रिसाव में यह उथल-पुथल वायु और खाद्य प्रदूषण बढ़ने के कारण हो रही है।
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महिलाओं के मातृत्व सुख पर प्रदूषण के कुठाराघात के मामलों की अमर उजाला ने स्टडी की। रश्मि का मामला तो उदाहरण के तौर पर बताया गया है, हमारे पास ऐसी दर्जनों केस स्टडी हैं जिनसे इस समस्या की विकरालता का खुलासा हो रहा है। इस स्टडी में चार महीने से लेकर दस साल तक की शादीशुदा महिलाओं के केसों का अध्ययन किया गया। इनके घर बच्चों की किलकारी नहीं गूंजी। अधिकांश युवतियां खुद इस समस्या को नहीं समझीं। गर्भ न ठहरने पर ससुरालवालों और परिचितों ने दबाव बनाया तो वे जांच के लिए अस्पताल पहुंचीं। 
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उनके हारमोंस की जांच में गड़बड़ी पाई गई। डॉक्टरों का कहना है कि एलएचएफएसएच, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रान हारमोंस मासिक धर्म के चक्र को संचालित करते हैं। इनका सामंजस्य बिगड़ रहा है। इन तीनों हारमोंस की जांच रिपोर्ट में जब उथल-पुथल मिली तो डॉक्टरों ने एएमएच हारमोन की जांच कराई। यह हारमोन अंडाशय (ओवेरी) में अंडों का रिजर्व बताता है कि अभी कितने अंडे और बनेंगे। इन महिलाओं में अंडों का रिजर्व बहुत कम मिला है। इससे इनके गर्भधारण की उम्मीद लगभग शून्य हो गई है। डॉ. पांडेय ने बताया कि यह समस्या बढ़ती जा रही है।

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ऐसे होता है प्रदूषण का असर 
वायु प्रदूषण से आर्सेनिक, बेनजियम, मैग्नीज, लेड आदि जहरीले तत्व सांस के साथ शरीर में जाकर खून में मिल जाते हैं। इससे हारमोंस रिसाव की ग्रंथियां प्रभावित होती और ये अधिक सक्रिय या निष्क्रिय हो जाती हैं। हारमोंस का बैलेंस बिगड़ जाता हैं। खाद्य प्रदूषण में खाने के साथ कीटनाशी और मिलावटी चीजों की टॉक्सिटी (जहरीले तत्व) खून में मिलकर स्थिति बिगाड़ते हैं। हारमोंस का बैलेंस बिगड़ने से मासिक धर्म का चक्र और अंडे बनने की प्रक्रिया बिगड़ जाती है।
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नंबर गेम 
- 12 साल से अधिकतम 50 साल तक चलता है मासिक धर्म का चक्र
- 01 से पांच-छह अंडे निकलते हैं एक मासिक धर्म में 
- 02 सौ महिलाएं प्रतिदिन आ रही जच्चा-बच्चा अस्पताल में
- 40 फीसदी महिलाओं में मिल रहा है दुष्प्रभाव


प्रदूषण के जहरीले तत्वों का असर महिलाओं पर दिखने लगा है। 40 फीसदी महिलाओं में दिक्कत पाई गई। किसी में शुरुआत थी तो किसी में स्थिति गंभीर। अंडाशय में अंडों का रिजर्व घट रहा है। इससे बचाव के लिए महिलाएं खानपान सुधारें। मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचें। साथ ही योग-व्यायाम करें जिससे शरीर की क्षमता बढ़े और प्रदूषण का दुष्प्रभाव किसी हद तक कम किया जा सके।

- डॉ. किरन पांडेय, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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