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जहरीली शराब कांडः पुलिस ने अवैध दारू की 12 फैक्ट्रियां पकड़ीं, कब जागेगा आबकारी विभाग?

Mon, 21 May 2018 01:51 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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अधिकारियों की वसूली और मिलीभगत की भी होगी जांच
कानपुर में जहरीली शराब कांड के बाद बड़े लेवल पर कार्रवाई शुरू हो गई है। नगर और देहात में 14 मौतों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। हैलट अस्पताल में भर्ती मरीजों का हालचाल जानने आईं प्रमुख सचिव (आबकारी) कल्पना अवस्थी ने बताया कि आबकारी विभाग कानपुर नगर और देहात में जहरीली शराब बिक्री की विभागीय जांच करेगा। दोषी अफसरों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। 
 आगे पढ़ेंः- अवाक रह गईं प्रमुख सचिव...
 
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दोषी अफसरों के खिलाफ होगी कार्रवाई: प्रमुख सचिव
प्रमुख सचिव यहां यह जानकर अवाक रह गईं कि नगर पुलिस ने बीते नौ महीने में अवैध शराब की 12 फैक्ट्रियां पकड़ीं, लेकिन जिला आबकारी विभाग ने किसी भी जगह जांच के लिए टीम तक नहीं भेजी। इतना ही नहीं जिन इलाकों में शराब की अवैध फैक्ट्रियां पकड़ी गईं, उन क्षेत्रों के क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षकों पर कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि ऐसे दो इलाकों के इस्पेक्टरों को मलाईदार इलाकों का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- खुद को इसके लिए जिम्मेदार मानती हैं प्रमुख सचिव...
 
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जहरीली शराब से दो की रोशनी गई, दो अन्य गंभीर
प्रमुख सचिव ने इसकी जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रमुख सचिव ने पत्रकारों को बताया कि वे स्वत: आई हैं। उनके विभाग में कुछ गड़बड़ हो रहा है तो वह भी खुद को इसके लिए जिम्मेदार मानती हैं। आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 31 मार्च को लाइसेंस खत्म होने के बावजूद दूल गांव में ठेका चलने, आबकारी अधिकारियों के सुविधा शुल्क वसूली के सवाल पर प्रमुख सचिव ने बताया कि इन तथ्यों की जांच होगी। सभी नए अनुज्ञापियों को बुलाकर निर्देश दिए गए हैं कि वे रजिस्टर्ड कंट्री लिकर (लाइसेंसधारी थोक विक्रेता) से ही शराब खरीदें। 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- जब जिला आबकारी अधिकारी भड़के........ 

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अधिकारियों की वसूली और मिलीभगत की भी होगी जांच
प्रेस वार्ता के दौरान ही जिला आबकारी अधिकारी अभिमन्यु सिंह भड़क गए। मीडिया से गलत व्यवहार करने लगे। अपना दोष या लापरवाही मानने के बजाय दूल गांव में अवैध रूप से जहरीली शराब बेचने वाले ठेकेदार का पक्ष लेते हुए लीलापोती की कोशिश करने लगे।  मीडिया पर ही आरोप लगाने लगे। मामला तूल पकड़ता देख प्रमुख सचिव ने उन्हें शांत कराया।
 आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- अफसर ठेकों पर पड़ताल करते तो न होता हादसा....
 
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कानपुर में जहरीली शराब से मौतों का मामला गहराया
शराब कांड के पीड़ितों के परिजनों ने हैलट में आबकारी विभाग के अफसरों पर ठेकों से हर महीने सुविधा शुल्क लेने और निरीक्षण न करने का आरोप लगाया। बताया कि यदि अफसर ठेकों पर जाकर जांच करते तो शायद ये हादसा न होता।

 आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- कई दिनों से मिल रही थी खराब शराब...
 
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शराब की पेटियां सील करते पुलिसवाले
जहरीली शराब पीने से हालत बिगड़ने के बाद रविवार को हैलट में भर्ती कराए गए विकलांग राकेश ने बताया कि बीते कई दिनों से गांव के ठेके पर मिलने वाली शराब में बहुत बदबू आ रही थी। स्वाद भी देशी शराब के विपरीत अजीब सा लग रहा था। गांव वालों ने ठेकेदार को भी यह बात बताई थी। अच्छी शराब मंगाने के लिए भी कहा लेकिन ठेकेदार वही शराब बेचता रहा।
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