नसीमुद्दीन सिद्दीकी मूलरूप से यहां स्योंढ़ा गांव के बाशिंदे हैं। वह राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबाल खिलाड़ी भी रहे हैं। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 1988 में बांदा नगर पालिका अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने से हुई। यह चुनाव हारने के बाद वह बसपा में शामिल हो गए। 1991 में बसपा के टिकट से बांदा सदर सीट से विधायक चुने गए।
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नसीमुद्दीन सिद्दीकी
- फोटो : अमर उजाला
बांदा के इतिहास में पहली बार कोई मुस्लिम विधायक हुआ। विधान परिषद में अयोग्य घोषित होने से समर्थकों में मायूसी है। 1993 में हुए उपचुनाव में नसीमुद्दीन बसपा के टिकट से चुनाव लड़े थे। इस बार कुछ वोटों से हार गए। 1995 में मायावती पहली बार मुख्यमंत्री बनीं तो उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया।
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नसीमुद्दीन सिद्दीकी
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद दूसरी बार 21 मार्च से 21 सितंबर 1997 तक मायावती सरकार में मंत्री रहे। तीसरी बार 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक माया सरकार में मंत्री रहे। इसके बाद 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक मायावती सरकार में एक दर्जन से ज्यादा विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे। वह बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली आदि के प्रभारी भी रहे।
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पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी
नसीमुद्दीन सिद्दीकी पिछले दो दशकों से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) हैं। उनका कार्यकाल जनवरी 2021 तक है। पत्नी हुसना सिद्दीकी भी पांच वर्ष एमएलसी रहीं। बेटे अफजल ने बसपा के टिकट पर फतेहपुर से वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा।