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खाकी-खादी दोनों का साथ, कैसे न होता ‘जय का विकास’, पूर्व डीआईजी से भी संबंध हो चुके हैं उजागर

Wed, 22 Jul 2020 08:41 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
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Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
जब खाकी (पुलिस) और खादी (राजनेता) दोनों का साथ जय को मिला तो उसका विकास होना लाजमी था। अपराधी विकास दुबे को भी ऐसे ही शख्स की जरूरत थी, जो उसके धन को बढ़ाए, पुलिस से बचाए और नेताओं में पैठ बनवाए। इन सभी कसौटियों पर खरा उतरने वाला जय विकास दुबे का खास गुर्गा बन गया था।
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Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
कुछ साल पहले तक स्क्रीन प्रिंटर्स में चार-पांच हजार की नौकरी करने वाले जय के हाथ ऐसी कौन सी जादू की छड़ी लग गई कि वह अरबों की संपत्ति का मालिक बन बैठा। यह सवाल जय को जानने वाले हर शख्स के मन में कौंधता है, लेकिन यह सब कुछ जय को ऐसे ही नहीं मिल गया। इसके लिए उसने सबका साथ, अपना विकास का फार्मूला अपनाया।

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जय बाजपेई - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा जय ने दर्जनभर से ज्यादा पुलिसकर्मियों को अपने जय विला में किरायेदार बना रखा है। क्षेत्र के दोनों थाने बजरिया और नजीराबाद का आधा स्टाफ, एसपी साउथ का ड्राइवर और स्टाफ जय के मकान में ही रहता है। पूर्व डीआईजी अनंत देव से भी जय के संबंध उजागर हो चुके हैं। डीआईजी के साथ जिसका उठना-बैठना हो, दरोगा और सिपाही जिसके किरायेदार हों उसकी क्षेत्र में तूती बोलना स्वाभाविक है।
 

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jai bajpai - फोटो : amar ujala
बड़ा भाई रजय सपा का सक्रिय सदस्य था। इसके चलते जल्द ही राजनेताओं के बीच भी जय ने अच्छी पैठ बना ली थी। जय किसी पार्टी से नहीं जुड़ा बल्कि अपने विकास के लिए सबको साथ लेकर चलने का फार्मूला अपनाता रहा। सपा विधायक इरफान सोलंकी, भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा, एमएलसी अरुण पाठक, प्रदेश मंत्री भाजपा सुरेश अवस्थी, हास्य अभिनेता राजू श्रीवास्तव, हास्य कलाकार अन्नू अवस्थी जैसे नेताओं व कलाकारों के साथ भी जय की फोटो सार्वजनिक हुई हैं। हालांकि, किसी के साथ फोटो खिंचवाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि दोनों में कैसे संबंध हैं, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते पहचानते हैं।
 
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vikas dubey news: Jai bajpai - फोटो : amar ujala
विकास से मिलकर शुरू किया प्रापर्टी हथियाने का काम
पुलिस और राजनेताओं का साथ मिलने के बाद विवादित मकानों को कब्जाने और अपनी धन-संपत्ति को दोगुना-चौगुना करने के लिए जय को गुंडे-बदमाशों की भी जरूरत पड़ती थी। भौंकाल गांठने के लिए शस्त्रों का प्रदर्शन और दबंगों की फौज भी उसका शौक बन गया। उसके इसी शौक ने उसे विकास दुबे से मिलवाया। विकास की दबंगई के बल पर जय मकानों पर कब्जे और वसूली का काम करता तो इसके बदले विकास की काली कमाई को सफेद करने में मदद करता था। इसीलिए जय को विकास का खजांची भी कहा जाता है।
 
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